दिल्ली में राहुल गांधी की अगुवाई में INDIA गठबंधन की महारैली, ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ का दिया नारा

रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी दलों के दिग्गज नेता, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग; SIR और कथित वोट चोरी का मुद्दा बना रैली का केंद्र

नई दिल्ली, 2 नवंबर। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ महारैली आयोजित की। रैली में विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लेकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए।

रैली का प्रमुख उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध विपक्ष की आवाज बुलंद करना रहा। कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के घटक दलों ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा राजनीतिक अभियान बताया।

राहुल गांधी का तीखा हमला, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई राज्यों के चुनावों का उल्लेख करते हुए कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने दावा किया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद मतदाता सूचियों से लगभग 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने इस आंकड़े के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। हालांकि, यह आंकड़ा राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है; निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण में नामों को हटाने की प्रक्रिया को अपात्र एवं डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का वोट उसकी आवाज है और किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली की दिशा में पहला कदम होगा।

मंच पर दिखी विपक्षी एकजुटता

इस महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, वामपंथी दलों के नेता एमए बेबी, डी. राजा और दीपांकर भट्टाचार्य सहित INDIA गठबंधन के अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। खुले वाहन में सवार नेताओं ने मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अभिवादन किया। इस मार्च को विपक्ष ने लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुटता का प्रदर्शन बताया।

खरगे और तेजस्वी यादव ने भी सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

वहीं, तेजस्वी यादव ने कथित वोट चोरी के मुद्दे को लोकतंत्र के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बताते हुए विपक्ष की लड़ाई को जनता के अधिकारों की लड़ाई बताया। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

विपक्ष की महारैली के बाद भाजपा ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन के दावों पर सवाल उठाए। भाजपा नेता संबित पात्रा ने रैली में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने का दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही थी, जबकि मैदान में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली थीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी की रैली पर पलटवार किया। उन्होंने 1 नवंबर को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी बताते हुए इस दिन रैली आयोजित करने पर कांग्रेस की आलोचना की। इस तरह रैली के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम, शांतिपूर्ण संपन्न हुई रैली

दिल्ली पुलिस ने रैली को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। रामलीला मैदान और आसपास के क्षेत्रों में 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। निगरानी के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और अन्य सुरक्षा संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली पुलिस के अनुमान के अनुसार रैली में लगभग 50 हजार लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने 10 लाख तक की भागीदारी की उम्मीद जताई थी। पुलिस के मुताबिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और कोई बड़ी कानून-व्यवस्था संबंधी घटना सामने नहीं आई।

लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता पर बढ़ेगी राजनीतिक बहस

दिल्ली की यह महारैली केवल एक राजनीतिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने देश में चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, निर्वाचन आयोग की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया कि विपक्ष कथित वोट चोरी के मुद्दे पर अपना अभियान जारी रखेगा। दूसरी ओर भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि INDIA गठबंधन इस आंदोलन को आगे किस रूप में ले जाता है और निर्वाचन आयोग तथा केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं।

 


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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