हिमालयी ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न आपदा के खतरों पर नैनीताल में दो दिवसीय कार्यशाला आज से

आपदा जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों पर होगा मंथन, विशेषज्ञ साझा करेंगे हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों और बचाव के उपाय

नैनीताल, 02 नवम्बर। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के फटने से उत्पन्न होने वाली बाढ़ (GLOFs) के खतरों और उनसे निपटने की प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा के लिए डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी, नैनीताल में आज से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी की ओर से 02 एवं 03 नवम्बर 2026 को “Disaster Risk Management: Strategies for Himalayan Glacial Lake Outburst Floods (GLOFs)” विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम निदेशक डॉ. मंजू पांडे ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन सत्र 02 नवम्बर को प्रातः 10:30 बजे आयोजित होगा। इसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं, हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित जोखिमों तथा आपदा पूर्व तैयारी और प्रभावी प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

हिमालयी क्षेत्र भौगोलिक एवं जलवायु संबंधी दृष्टि से संवेदनशील है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में झीलों का विस्तार हो रहा है। ऐसी झीलों के प्राकृतिक अवरोध टूटने पर अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है, जिससे जनजीवन, आधारभूत संरचनाओं, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए इस विषय पर विशेषज्ञों का मंथन विशेष महत्व रखता है। कार्यशाला में आपदा जोखिम का आकलन, पूर्व चेतावनी प्रणाली, निगरानी व्यवस्था और आपदा के प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

कार्यक्रम निदेशक डॉ. मंजू पांडे ने उद्घाटन सत्र में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को सादर आमंत्रित किया है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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