जौहार की संस्कृति उत्तराखण्ड की आत्मा, इसे संजोना हम सभी की जिम्मेदारी : दीपक रावत

हल्द्वानी में तीन दिवसीय जौहार महोत्सव का भव्य शुभारंभ, शौका जनजाति की लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्पादों ने मोहा मन

हल्द्वानी, 01 नवम्बर। एम.बी. इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित तीन दिवसीय जौहार महोत्सव का रविवार को सचिव मुख्यमंत्री एवं आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि जौहार घाटी की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत पूरे उत्तराखण्ड की पहचान हैं। शौका जनजाति के लोगों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक विरासत को जिस तरह संरक्षित रखा है, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि जौहार की संस्कृति वास्तव में उत्तराखण्ड की आत्मा है।

आयुक्त ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन हमारी लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और पलायन रोकने की दिशा में भी सार्थक साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास और उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

लोकनृत्य और पारंपरिक उत्पाद रहे आकर्षण

महोत्सव में मुनस्यारी, धारचूला और मिलम क्षेत्र से पहुंचे शौका जनजाति के कलाकारों ने पारंपरिक छोलिया, झोड़ा और चांचरी नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया।

महोत्सव परिसर में जौहार क्षेत्र के प्रसिद्ध ऊनी उत्पादों थुलमा, पंखी, कालीन के साथ स्थानीय जड़ी-बूटियों और जैविक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें भट्ट के डुबके, मंडुवे की रोटी और भांग की चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजन विशेष रूप से पसंद किए गए।

स्टॉलों का निरीक्षण कर आयोजकों को दी बधाई

कार्यक्रम में सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला विकास अधिकारी, महोत्सव संयोजक मंडल के सदस्य, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर आयुक्त दीपक रावत ने महोत्सव परिसर में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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