ग्राफिक एरा में राज्य स्तरीय सेमिनार का समापन, पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर हुआ मंथन
सतत विकास और युवा नवाचार से बदलेगी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था

हल्द्वानी, 9 अक्टूबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के हल्द्वानी परिसर में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का शुक्रवार को समापन हो गया। 8 और 9 अक्टूबर को आयोजित इस सेमिनार में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और शोधार्थियों ने सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा, जल संरक्षण, युवा सशक्तीकरण और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
सेमिनार का विषय ‘सतत अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन एवं समावेशी विकास हेतु युवा-नेतृत्व वाले नवाचार के माध्यम से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का रूपांतरण’ रहा। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और पीडीपी विभाग ने ‘आरोही’ संस्था के सहयोग से इसका आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरण के अनुकूल विकास की संभावनाओं पर मंथन करना था।
आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जरूरी
उद्घाटन सत्र में ग्राफिक एरा हल्द्वानी परिसर के निदेशक डॉ. एमसी लोहानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसके बाद सेमिनार की संयोजक प्रो. (डॉ.) बीना नारायण ने आयोजन के उद्देश्यों और दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान शिक्षाविदों और शोधार्थियों के विचारों पर आधारित सेमिनार की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
मुख्य वक्ता और उत्तराखंड सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राज शेखर जोशी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ सामाजिक अवसंरचना को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण विकास, कौशल उन्नयन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य की जरूरत बताते हुए इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध प्रयास करने पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने प्रदेश में उभरते स्टार्टअप परिवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
पलायन रोकने और आय की असमानता दूर करने पर चर्चा
‘विजन उत्तराखंड 2047’ के तहत आयोजित विशेष पैनल चर्चा में प्रति व्यक्ति आय की असमानता दूर करने और सतत विकास के माध्यम से युवाओं के पलायन को रोकने पर विचार-विमर्श किया गया। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार जोशी ने चर्चा का संचालन किया।
पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने प्रदेश के कम चर्चित पर्यटन स्थलों को विकसित करने और कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. पीडी पंत ने नदियों के संरक्षण में स्थानीय संस्कृति और संसाधनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं, वाटरशेड प्रबंधन निदेशालय के डॉ. एसके उपाध्याय ने जल संरक्षण को आजीविका के साधनों से जोड़ने पर जोर दिया। आईसीएआर-आईवीआरआई के डॉ. शेर सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बताई। आरोही सोसाइटी के समिरन नारायण ने पर्यटन गतिविधियों को समावेशी और सुनियोजित तरीके से विकसित करने की बात कही।
चार प्रमुख विषयों पर प्रस्तुत किए शोधपत्र
सेमिनार हाइब्रिड माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में चार प्रमुख विषयों के तहत चर्चा हुई। इनमें सतत अवसंरचना एवं जलवायु परिवर्तन, उद्यमिता एवं युवा सशक्तीकरण, विजन उत्तराखंड 2047 एवं निरंतरता और ऑनलाइन ट्रैक शामिल रहे।
विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, हरित अभियांत्रिकी, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण अनुकूल पर्यटन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय संतुलन और युवाओं की भागीदारी को प्राथमिकता देकर उत्तराखंड के लिए दीर्घकालिक विकास का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
पोस्टर प्रतियोगिता में लक्ष्मी पंवार प्रथम
सेमिनार के दौरान आयोजित पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में ग्राफिक एरा हल्द्वानी के बीएजेएमसी की छात्रा लक्ष्मी पंवार ने पहला स्थान प्राप्त किया। एमआईईटी के शैलेंद्र कांडपाल दूसरे स्थान पर रहे। तीसरा स्थान संयुक्त रूप से एमआईईटी की वर्षा नैनवाल और जीईएचयू की शगुन जलहोत्रा को मिला। परिणीत वर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक डॉ. आनंद जोशी ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों और स्वयंसेवकों की सराहना की।








