“UPI शुल्क पर सियासी संग्राम: कांग्रेस ने उठाए सवाल, ₹2000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर MDR व्यवस्था से बढ़ी बहस”

नई दिल्ली। यूपीआई भुगतान को लेकर केंद्र सरकार की हालिया अधिसूचना के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोला गया है और इसका अप्रत्यक्ष असर आगे चलकर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि दुकानदारों से लिए जाने वाले संभावित MDR का अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर तो नहीं पड़ेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि ₹5,000 के लेनदेन पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक शुल्क लग सकता है। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो व्यापारी पर लगने वाली फीस की भरपाई किस प्रकार होगी। ये कांग्रेस के राजनीतिक दावे हैं; इन्हें मौजूदा लागू उपभोक्ता शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अधिसूचना में क्या बदला?
14 सितंबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार, ₹2,000 तक के UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रदाता भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते। साथ ही, संशोधित कानूनी व्यवस्था ने ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट भुगतान पर MDR निर्धारित करने के लिए ढांचा उपलब्ध कराया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, NPCI ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क निर्धारित किया है, जिसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह शुल्क ग्राहकों से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
विवाद का मुख्य मुद्दा
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं—सीधे ग्राहक से UPI शुल्क लेना और व्यापारी स्तर पर MDR लगना। सरकार की ओर से कहा गया है कि MDR व्यापारी पर लागू होता है, ग्राहक पर नहीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पहले कहा था कि MDR से मिलने वाला राजस्व बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और नवाचार में निवेश करने में मदद करेगा।
वहीं कांग्रेस का तर्क है कि यदि व्यापारियों की लागत बढ़ती है तो व्यापारी भविष्य में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में उसका कुछ हिस्सा शामिल कर सकते हैं। यह कांग्रेस की आशंका/राजनीतिक व्याख्या है, न कि यह प्रमाण कि ऐसा मूल्य-वृद्धि प्रभाव निश्चित रूप से होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर ग्राहक से सीधे अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन के लिए MDR व्यवस्था अलग है और वर्तमान विवाद मुख्यतः इसी व्यवस्था के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर है।





