आर्मी की वर्दी का दुरुपयोग करने वाला संदिग्ध व्यक्ति गिरफ्तार

दिनांक 18/04/2026 को वादी मेजर अजय पाठक पुत्र पूरन चन्द्र पाठक निवासी म0न0-1087/L, वार्ड नं0-6, गीतांजली गली, शीशमहल काठगोदाम द्वारा वॉकवे मॉल के पास एक व्यक्ति को सेना की वर्दी पहने हुए संदिग्ध अवस्था में देखा गया। उक्त व्यक्ति स्वयं को आर्मी में “मेजर” बताते हुए अपना नाम मेजर अमन बता रहा था।

मेजर अजय पाठक को उक्त व्यक्ति की वर्दी धारण करने की शैली एवं गतिविधियाँ संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्होंने तत्काल क्षेत्र में मौजूद पीसी-4 पुलिस टीम को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुँचकर उक्त व्यक्ति से पूछताछ की गई, किन्तु वह अपने संबंध में कोई ठोस एवं सत्य जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका।

पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही:-

डॉ० मंजूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल उक्त सूचना प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु निर्देश दिए गए।
उक्त निर्देशों के क्रम में श्री मनोज कुमार कत्याल, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी के मार्गदर्शन एवं श्री अमित कुमार सैनी, क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी के पर्यवेक्षण में संदिग्ध व्यक्ति को पूछताछ हेतु थाना काठगोदाम लाया गया।

प्रथम दृष्टया सेना की वर्दी का दुरुपयोग एवं संदिग्ध गतिविधियों को दृष्टिगत रखते हुए, वादी मेजर अजय पाठक द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर श्री विमल मिश्रा, थानाध्यक्ष काठगोदाम* के द्वारा थाना काठगोदाम में FIR NO-54/26 धारा 168 BNS के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया।

पूछताछ का विवरण:-

पूछताछ के दौरान उक्त व्यक्ति ने अपना नाम अमन उर्फ अमन रोमसन पुत्र क्रिस्टोफर मसीह निवासी नौषर नसर, खटीमा, जनपद ऊधमसिंहनगर, उम्र 24 वर्ष बताया।
वर्तमान में वह सुचेतना समाज सेवा केन्द्र, निर्मला कान्वेंट स्कूल के पास, थाना काठगोदाम क्षेत्र में कार्यरत है।
पूछताछ में यह भी प्रकाश में आया कि उसे सेना के प्रति अत्यधिक आकर्षण है तथा सेना में भर्ती होने की तीव्र इच्छा थी, किन्तु भर्ती में असफल होने के कारण उसने
सेना की वर्दी धारण की।

प्रकरण में अग्रिम आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। उक्त व्यक्ति से आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट एवं सी0एम0पी0 द्वारा भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस टीम में उ0नि0 केदार सिंह राणा और का0 चालक दीपक कुंवर शामिल रहे.


Advertisements

गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

You cannot copy content of this page