पांच साल में सरकारी भूमि पर कब्जों का हिसाब, राजस्व परिषद ने माना 3,307 मामले दर्ज
देहरादून में 851 और ऊधमसिंह नगर में 1,000 से अधिक मामले, अतिक्रमण पर सवाल

देहरादून/हल्द्वानी। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राजस्व परिषद के 5 अगस्त 2026 के पत्र के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच प्रदेश में अतिक्रमण और अवैध कब्जे के कुल 3,307 मामले दर्ज हैं, जिनसे संबंधित भूमि का कुल क्षेत्रफल 1,239.28150 हेक्टेयर बताया गया है।
दस्तावेज में दिए गए जिला वार विवरण के अनुसार पौड़ी गढ़वाल में 150, पिथौरागढ़ में 21, टिहरी गढ़वाल में 304, चम्पावत में 1, बागेश्वर में 74, ऊधमसिंह नगर में 1,000 से अधिक, हरिद्वार में 422, उत्तरकाशी में 360 से अधिक, नैनीताल में 131, देहरादून में 851, चमोली में 30, अल्मोड़ा में 3 और रुद्रप्रयाग में 25 मामले दर्ज हैं।
आंकड़ों के अनुसार ऊधमसिंह नगर में विभिन्न वर्षों के मामलों में भूमि का बड़ा हिस्सा शामिल है, जबकि देहरादून में वर्ष 2023 में अकेले 51.01678 हेक्टेयर भूमि से जुड़े 386 मामले दर्ज किए गए। नैनीताल जिले में वर्ष 2020 से 2025 तक अलग अलग वर्षों में मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें वर्ष 2024 में 56 और वर्ष 2025 में 13 मामले दर्शाए गए हैं।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह सूचना उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 122 और 209 से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर दी गई है। दस्तावेज में धारा 122 के तहत भूमि प्रबंधन समिति और कलेक्टर की भूमिका तथा सरकारी और ग्राम सभा भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ नोटिस, क्षति निर्धारण और बेदखली की प्रक्रिया का उल्लेख है।
परिषद के अनुसार यह सूचना शासन को उपलब्ध कराए गए विवरण और जिलों से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर संकलित की गई है। सामने आए आंकड़े सरकारी भूमि की निगरानी, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और लंबित मामलों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब जिला स्तर पर बेदखली, वसूली और वर्तमान स्थिति को लेकर अलग अलग जांच की जरूरत सामने आ गई है।








