काम की खबर : LPG की महंगाई से होटल कारोबारियों को राहत! हल्द्वानी का पेलेट स्टोव बना कम खर्च का नया विकल्प


हल्द्वानी। आज के दौर में किसी भी रेस्टोरेंट मालिक, ढाबा संचालक, होटल व्यवसायी या कैटरर के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वाद नहीं, बल्कि बढ़ती परिचालन लागत को नियंत्रित करना बन गई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने मुनाफे का मार्जिन प्रभावित किया है। ऐसे में होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोग अब वैकल्पिक ईंधन की तलाश कर रहे हैं।
इसी बीच हल्द्वानी से शुरू हुई एक पहल तेजी से चर्चा में है। बायोमास पेलेट स्टोव अब केवल ढाबों और होम किचन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि बड़े होटल, कैंटीन और औद्योगिक रसोईघरों में भी अपनी जगह बना रहा है। लकड़ी के बुरादे और कृषि अवशेषों से तैयार पेलेट्स पर आधारित यह तकनीक ईंधन खर्च कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक विकल्प के रूप में देखी जा रही है।
हल्द्वानी से शुरू हुई पहल, अब पूरे कुमाऊं में बढ़ रही मांग
हल्द्वानी में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से करीब दो वर्ष पहले कृष्णा बिष्ट ने बायोमास पेलेट स्टोव के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया था। शुरुआती दौर में इस तकनीक को लेकर लोगों की दिलचस्पी सीमित रही, लेकिन हाल के वर्षों में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच व्यापारियों का रुझान तेजी से इस ओर बढ़ा है।
बताया जा रहा है कि कैटरिंग, होटल और ढाबा संचालकों ने इसे वैकल्पिक ईंधन के रूप में अपनाना शुरू किया है। उपयोगकर्ताओं का दावा है कि बेहतर प्रदर्शन और कम परिचालन लागत के कारण यह विकल्प कुमाऊं क्षेत्र में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
ईंधन खर्च में बचत का दावा
पेलेट स्टोव को बढ़ावा देने वाले कृष्णा बिष्ट के अनुसार, जो कमर्शियल किचन प्रतिदिन दो से तीन एलपीजी सिलेंडरों की खपत करते हैं, वे इस तकनीक को अपनाकर ईंधन खर्च में 30 से 50 प्रतिशत तक बचत कर सकते हैं। उनका दावा है कि एक औसत होटल या कैटरिंग व्यवसायी को प्रतिमाह ₹40,000 से ₹70,000 तक की बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत व्यवसाय के आकार, उपयोग और स्थानीय ईंधन कीमतों पर निर्भर करेगी।
कचरे से ऊर्जा बनाने की आधुनिक तकनीक
विशेषज्ञों के अनुसार, बायोमास पेलेट स्टोव पारंपरिक चूल्हा नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग पर आधारित प्रणाली है। इसमें लकड़ी के बुरादे, मूंगफली के छिलके, पराली और अन्य कृषि अवशेषों से तैयार छोटे बेलनाकार पेलेट्स का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इससे कृषि अपशिष्ट का उपयोग बढ़ने के साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
जानकारी के लिए संपर्क
पेलेट स्टोव से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इच्छुक होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन एवं कैटरिंग व्यवसायी संपर्क कर सकते हैं—
कृष्णा बिष्ट, हल्द्वानी
मोबाइल: +91 97190 55582 ध्यान रहे कि इसमें दिए गए बचत के दावे (30–50% और ₹40,000–₹70,000) तथा अन्य व्यावसायिक दावे संबंधित पक्ष के दावे के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं, न कि सत्यापित तथ्य के रूप में।







