नोटिस की विसंगति के अनुसार दें दस्तावेज, 24 लाख मतदाताओं को आयोग ने भेजे नोटिस
आठ तरह की गड़बड़ियों पर चल रही जांच, बीएलओ की रिपोर्ट और संबंधित प्रमाणपत्र से होगा निस्तारण


देहरादून। प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने करीब 24 लाख मतदाताओं को विभिन्न प्रकार की विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है। संबंधित विसंगति के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर या बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) की रिपोर्ट के आधार पर मामले का निस्तारण कराया जा सकता है।
आयोग के अनुसार मतदाता सूची में पारिवारिक संबंध, आयु और प्रोजनी मैपिंग से जुड़ी आठ प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं। इन्हें दूर करने के लिए संबंधित मतदाताओं से प्रमाण मांगे जा रहे हैं। जिन मामलों में दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, वहां बीएलओ की जांच रिपोर्ट को भी आधार बनाया जाएगा।
इन विसंगतियों में मांगे जाएंगे दस्तावेज
मतदाता और माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर होने पर मतदाता की आयु का प्रमाण (10वीं की मार्कशीट, जन्म प्रमाणपत्र आदि) और माता या पिता की आयु संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। यदि माता-पिता नहीं हैं तो बीएलओ अपनी जांच रिपोर्ट देंगे।
मतदाता और माता-पिता की आयु में 50 वर्ष से अधिक का अंतर होने पर भी मतदाता की आयु और माता-पिता की आयु संबंधी दस्तावेज देने होंगे। अभिभावक नहीं होने पर बीएलओ की रिपोर्ट मान्य होगी।
मतदाता और दादा-दादी या नाना-नानी की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर मिलने पर यदि यह डेटा एंट्री की गलती है तो बीएलओ की रिपोर्ट पर्याप्त होगी। यदि दादा-दादी जीवित नहीं हैं तो ग्राम प्रधान या जनप्रतिनिधि से प्रमाणित विवरण सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करना होगा।
भाई-बहन या दो भाइयों की आयु में नौ माह से कम का अंतर पाए जाने पर दोनों के जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे। इसके आधार पर बीएलओ अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।
एक ही मतदाता के साथ प्रोजनी (संतान) के रूप में छह से अधिक लोगों की मैपिंग होने पर बीएलओ मौके पर सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे।
ये 11 दस्तावेज होंगे मददगार
आयोग ने दस्तावेजों की सूची भी जारी की है, जिनमें प्रमुख रूप से—
केंद्र, राज्य सरकार, पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी का पहचान पत्र।
एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या पीएसयू की ओर से जारी पहचान पत्र या प्रमाणपत्र।
सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र।
वैध पासपोर्ट।
मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय का 10वीं का प्रमाणपत्र।
स्थायी निवास प्रमाणपत्र।
वन अधिकार प्रमाणपत्र।
ओबीसी, एससी, एसटी अथवा अन्य जाति प्रमाणपत्र।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से संबंधित दस्तावेज।
सरकारी अधिकारियों की ओर से जारी परिवार रजिस्टर।
सरकार की ओर से जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र।
आधार कार्ड।
आयोग का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद निर्धारित समय में संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने या बीएलओ के समक्ष तथ्य स्पष्ट करने पर मामले का नियमानुसार निस्तारण कर दिया जाएगा। इससे मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।







