1984 से भाजपा का झंडा थामे हैं सुरेश तिवारी, अब कालाढूंगी से चुनावी ताल ठोकने को तैयार

चार दशक से अधिक समय से संगठन के साथ निभा रहे हैं निष्ठा, मंडल से प्रदेश स्तर तक संभाली जिम्मेदारियां; 2027 के चुनाव में टिकट की दावेदारी से बढ़ी सियासी हलचल

हल्द्वानी। भारतीय जनता पार्टी में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दावेदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। नैनीताल जिले की कालाढूंगी विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने अपनी चुनावी दावेदारी पेश कर पार्टी के भीतर नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह है कि तिवारी की दावेदारी के पीछे उनका चार दशक से अधिक पुराना संगठनात्मक सफर भी प्रमुख आधार है।

सुरेश तिवारी ने बताया कि वह वर्ष 1984 से भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में संगठन से जुड़े हुए हैं। यह वह दौर था, जब भाजपा अपने शुरुआती राजनीतिक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही थी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ता विषम परिस्थितियों में भी लगातार मेहनत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के शुरुआती दौर से लेकर वर्तमान समय तक उन्होंने संगठन की विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है।

मंडल से प्रदेश स्तर तक निभाई संगठन की जिम्मेदारी

तिवारी के अनुसार, अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने मंडल से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन किया है। पार्टी के संघर्ष, विस्तार और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के अनेक दौर के वह साक्षी रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा उनके लिए केवल राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक ऐसा संगठन है, जिसके साथ उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय कार्यकर्ता के रूप में समर्पित किया है।

कालाढूंगी से चुनाव लड़ने की जताई इच्छा

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सुरेश तिवारी ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के समक्ष कालाढूंगी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें प्रत्याशी बनने का अवसर देता है तो वह पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कालाढूंगी सीट पर पूर्व में जीत दर्ज करने वाले विधायकों से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल करने का प्रयास करेंगे।

चार दशक की संगठनात्मक यात्रा को बनाया दावेदारी का आधार

सुरेश तिवारी की दावेदारी में वर्ष 1984 से संगठन के साथ उनका जुड़ाव और विभिन्न स्तरों पर निभाई गई जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण रूप से सामने आई हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को भी चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। अब देखना होगा कि भाजपा का प्रदेश एवं केंद्रीय नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव में कालाढूंगी सीट को लेकर क्या निर्णय लेता है।

फिलहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कालाढूंगी में भाजपा के भीतर दावेदारी का दौर शुरू हो गया है और सुरेश तिवारी की सक्रियता ने इस राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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