उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पांच दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ

2 से 6 नवंबर तक आयोजित होंगी विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं, पहले दिन क्विज प्रतियोगिता में 16 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत 2 से 6 नवंबर 2026 तक विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक प्रो. रेनू प्रकाश ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं शिक्षार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सभी उपस्थित लोगों द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के गायन के साथ हुई।

इस अवसर पर प्रो. पी.डी. पंत ने आयोजन की सराहना करते हुए सभी से पूरे उत्साह एवं सक्रियता के साथ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने की अपील की। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव खेमराज भट्ट ने भी कार्यक्रम को उत्साहपूर्वक मनाने और इसमें अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के प्रथम दिन ‘वन्दे मातरम्’ विषय पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 16 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका तथा राष्ट्रीय चेतना एवं देशभक्ति की भावना से परिचित कराना रहा।

क्विज प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. विनोद कुमार रहे। इस दौरान आयोजन मंडल के सदस्य डॉ. लता जोशी, सुश्री प्रिया बोरा, डॉ. अरुषि ध्यानी, डॉ. दीप प्रकाश, डॉ. दिनेश कांडपाल एवं डॉ. गोपाल गौनिया भी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 3 नवंबर को सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, 4 नवंबर को चित्रकला प्रतियोगिता, 5 नवंबर को निबंध प्रतियोगिता तथा 6 नवंबर को गायन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। गायन प्रतियोगिता के समापन के बाद पुरस्कार वितरण समारोह भी होगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य शिक्षार्थियों की बौद्धिक एवं रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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