सांस की बदबू क्यों करे परेशान, आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत
डॉ राजीव कुरेले

देहरादून। क्या बातचीत के दौरान सामने वाला व्यक्ति बार-बार दूरी बनाने लगे? क्या सफर में आपके आसपास बैठे लोग नाक पर रूमाल रखने लगते हैं? यदि ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे केवल लोगों के व्यवहार के रूप में न लें। मुंह से आने वाली दुर्गंध यानी हैलिटोसिस भी इसका एक कारण हो सकती है। कई बार व्यक्ति स्वयं अपनी सांस की दुर्गंध महसूस नहीं कर पाता, लेकिन आसपास के लोग इसे आसानी से महसूस कर लेते हैं। अच्छी बात यह है कि अधिकांश मामलों में मुंह की स्वच्छता, खानपान और दिनचर्या में सुधार से समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. राजीव कुरेले, वेद विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून के अनुसार, सांस की दुर्गंध को केवल अस्थायी समस्या मानकर दबाने के बजाय उसके कारण को समझना जरूरी है। जीभ पर जमी परत, दांतों के बीच फंसे भोजन के कण, मसूड़ों की समस्या, मुंह का सूखापन और दांतों की सफाई में कमी इसके सामान्य कारणों में शामिल हो सकते हैं।
जीभ की सफाई को बनाएं दिनचर्या
मुंह की सफाई में अक्सर लोग केवल दांतों को ही महत्व देते हैं, जबकि जीभ की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। भोजन के सूक्ष्म कण, मृत कोशिकाएं और बैक्टीरिया जीभ की सतह पर जमा हो सकते हैं। इससे जीभ पर सफेद या पीली परत दिखाई दे सकती है और दुर्गंध पैदा करने वाले तत्व बनने लगते हैं।
सुबह उठने के बाद दांतों की सफाई के साथ जीभ को टंग क्लीनर या जीभ साफ करने वाले उपकरण से धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। बहुत अधिक दबाव डालकर जीभ रगड़ने से बचना चाहिए।
भोजन के बाद कुल्ला करना लाभकारी
हर बार भोजन के बाद ब्रश करना संभव नहीं होता। ऐसे में सामान्य पानी से अच्छी तरह कुल्ला करना भी उपयोगी आदत है। इससे मुंह में बचे भोजन के कण काफी हद तक निकल जाते हैं।
सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात के भोजन के बाद कुल्ला करने की आदत बनाई जा सकती है। रात को सोने से पहले दांतों और जीभ की अच्छी तरह सफाई विशेष रूप से जरूरी है।
दांतों और मसूड़ों की अनदेखी न करें
दांतों में सड़न, मसूड़ों से खून आना, सूजन, दर्द, दांतों के बीच भोजन फंसना या लंबे समय तक मुंह में दुर्गंध रहना केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं है। ये मुंह से संबंधित किसी समस्या का संकेत हो सकते हैं।
यदि नियमित सफाई के बावजूद दुर्गंध बनी रहती है तो दंत चिकित्सक से जांच कराना उचित है। विशेष रूप से दांत में दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव, पस, लगातार सूजन या मुंह में घाव होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मुंह को सूखने न दें
मुंह का सूखापन भी सांस की दुर्गंध को बढ़ा सकता है। पर्याप्त पानी पीना और लंबे समय तक मुंह सूखा न रहने देना उपयोगी है। बहुत देर तक कुछ न खाने, पर्याप्त पानी न पीने या कुछ दवाओं के कारण भी मुंह में सूखापन हो सकता है।
आयुर्वेद में मुख स्वच्छता पर जोर
आयुर्वेद में दंतधावन, जिह्वा निर्लेखन और गण्डूष-कवल जैसी मुख स्वच्छता की प्रक्रियाओं का उल्लेख मिलता है। आधुनिक जीवनशैली में इनका प्रयोग व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सरल तरीके से किया जा सकता है।
सुबह जीभ की सफाई, दांतों की नियमित सफाई और भोजन के बाद मुंह को पानी से साफ करना दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। आयुर्वेदिक परंपरा में तिल तेल आदि से कवल या ऑयल पुलिंग का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसे दांतों की ब्रशिंग का विकल्प नहीं मानना चाहिए और तेल को निगलना नहीं चाहिए।
तेज गंध वाले खाद्य पदार्थों का रखें ध्यान
प्याज, लहसुन, तंबाकू, धूम्रपान और कुछ अन्य पदार्थ सांस में अस्थायी दुर्गंध पैदा कर सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद पानी पीना और कुल्ला करना मददगार हो सकता है। तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना मुंह के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
माउथवॉश का इस्तेमाल सोच-समझकर
बाजार में उपलब्ध माउथवॉश सांस की दुर्गंध को कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं। लेकिन इनका उपयोग दुर्गंध के मूल कारण का उपचार नहीं है। किसी भी माउथवॉश को अत्यधिक मात्रा में या लंबे समय तक अपनी इच्छा से इस्तेमाल करने के बजाय चिकित्सक या दंत चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है।
इसी तरह केवल इलायची, लौंग या किसी सुगंधित पदार्थ से दुर्गंध को ढक देना स्थायी समाधान नहीं है। यदि समस्या बार-बार हो रही है तो कारण की जांच जरूरी है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
यदि मुंह की नियमित सफाई और खानपान में सुधार के बावजूद कई सप्ताह तक सांस की दुर्गंध बनी रहती है तो दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। इसके अलावा मसूड़ों से लगातार खून आना, दांतों में दर्द या सड़न, मुंह का लगातार सूखना, निगलने में परेशानी या मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव हो तो चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है।
कभी-कभी लगातार सांस की दुर्गंध मुंह के अलावा नाक-गले की समस्या, एसिड रिफ्लक्स या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी जुड़ी हो सकती है। इसलिए केवल माउथ फ्रेशनर का सहारा लेना उचित नहीं है।
ये छोटी आदतें रखें याद
– सुबह उठकर दांत और जीभ साफ करें।
– दिन में कम से कम दो बार ब्रश करने की आदत रखें।
– भोजन के बाद पानी से कुल्ला करें।
– पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
– दांतों के बीच फंसे भोजन को साफ करने की उचित विधि अपनाएं।
– तंबाकू और धूम्रपान से बचें।
– नियमित अंतराल पर दांतों की जांच कराएं।
– लगातार दुर्गंध रहने पर उसके मूल कारण की जांच कराएं।
डॉ. राजीव कुरेले के अनुसार, स्वस्थ मुंह केवल सुंदर मुस्कान के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। सांस की दुर्गंध को शर्मिंदगी का कारण बनाने के बजाय इसे शरीर की ओर से मिलने वाले संकेत के रूप में समझना चाहिए। नियमित मुख स्वच्छता, संतुलित खानपान और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
लेखक उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर है







