सरकारी जमीन बचाने की लड़ाई में हरीश पनेरू ने संभाला मोर्चा, मल्ला रामगढ़ में आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन

नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी भी पहुंचे धरना स्थल, पूर्व दर्जा मंत्री हरीश पनेरू ने जनहित के मुद्दे पर बुलंद की आवाज; पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और पूर्व ब्लॉक प्रमुख लाखन सिंह नेगी ने भी दिया समर्थन
रामगढ़ (नैनीताल)। जनहित के मुद्दों पर लगातार मुखर रहने वाले राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरू ने एक बार फिर जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। भीमताल विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड रामगढ़ के मल्ला रामगढ़ में बेशकीमती सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में चल रहे आंदोलन में पहुंचकर पनेरू ने क्षेत्रवासियों की आवाज बुलंद की। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। दोनों नेताओं की मौजूदगी से आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समर्थन मिला।
हरीश पनेरू लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। मल्ला रामगढ़ में सरकारी भूमि को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन में उनकी सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और आम जनता के हितों से जुड़े सवालों पर वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने के मामले पर गंभीर सवाल उठाए।
धरना स्थल पर नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरू ने कहा कि सरकारी जमीन जनता की सामूहिक संपत्ति है। इसका उपयोग व्यापक जनहित और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए होना चाहिए। यदि सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया जा रहा है तो उसकी पूरी प्रक्रिया, उद्देश्य और जनहित से जुड़े पहलुओं को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।
जनता के मुद्दों पर पनेरू की सक्रियता फिर चर्चा में
मल्ला रामगढ़ में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान हरीश पनेरू की मौजूदगी विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। उन्होंने क्षेत्रवासियों के आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए सरकारी संपत्तियों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। जनहित के मुद्दों पर धरना-प्रदर्शनों में भागीदारी और जनता के साथ खड़े होने की उनकी भूमिका को स्थानीय लोगों ने भी महत्वपूर्ण माना। उनका कहना था कि सरकारी भूमि का संरक्षण केवल किसी एक गांव या क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के हितों से भी जुड़ा है।
पूर्व विधायक और पूर्व ब्लॉक प्रमुख भी पहुंचे धरना स्थल
मल्ला रामगढ़ में आयोजित धरना-प्रदर्शन में कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और रामगढ़ के पूर्व ब्लॉक प्रमुख लाखन सिंह नेगी भी शामिल हुए। इसके अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने धरना स्थल पर पहुंचकर सरकारी भूमि को सार्वजनिक हितों के लिए सुरक्षित रखने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी संपत्तियां किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि जनता की धरोहर होती हैं। इनका संरक्षण करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसी भूमि का इस्तेमाल क्षेत्र के विकास, जनसुविधाओं और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज
धरने के दौरान वक्ताओं ने सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने से जुड़े निर्णय और उसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय लोगों की भावनाओं और व्यापक जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सरकारी जमीन का मुद्दा बना जनआंदोलन
मल्ला रामगढ़ की सरकारी भूमि का मामला अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर राजनीतिक और जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। हरीश पनेरू की सक्रिय भागीदारी, नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी के समर्थन और अन्य पूर्व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस मुद्दे को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकारी भूमि को लेकर उठ रही आपत्तियों और जनता की मांगों पर शासन-प्रशासन क्या निर्णय लेता है।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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