भू-कानून, मूल निवास और रोजगार के मुद्दों पर यूकेडी का आंदोलन तेज, बुद्ध पार्क में तीसरे दिन भी धरना जारी

18 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता, सरकार से मांगों पर ठोस कदम उठाने की मांग
80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, 1950 को मूल निवास की कटऑफ तिथि तय करने और सख्त भू-कानून लागू करने की उठाई आवाज
हल्द्वानी, 20 अक्टूबर। उत्तराखंड के बुनियादी मुद्दों, स्थानीय अधिकारों और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास की मांगों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) का आंदोलन लगातार जारी है। हल्द्वानी के बुद्ध पार्क (तिकोनिया) में 18 अक्टूबर से शुरू हुआ पार्टी का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर जुटे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भू-कानून, मूल निवास, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार तथा पहाड़ों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
यूकेडी ने इन मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार से प्रभावी नीतियां बनाने और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के पीछे स्थानीय संसाधनों पर जनता के अधिकार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और पर्वतीय क्षेत्रों का संतुलित विकास जैसे उद्देश्य प्रमुख थे। इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखकर दल अब आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित करने में जुटा है।
उत्थान यात्रा के बाद धरने के जरिए आंदोलन को धार
उत्तराखंड क्रांति दल ने 11 अक्टूबर 2026 को हल्द्वानी से अपनी ‘उत्तराखंड उत्थान यात्रा’ के पहले चरण की शुरुआत की थी। इस यात्रा के दौरान कुमाऊं मंडल के विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर पार्टी ने अपने मुद्दों को जनता के सामने रखा। इसके बाद 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, उत्थान यात्रा का उद्देश्य राज्य के बुनियादी सवालों को लेकर लोगों को जागरूक करना और स्थानीय समस्याओं को व्यापक स्तर पर उठाना है। अब धरने के माध्यम से इन मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।
सख्त भू-कानून लागू करने की मांग
यूकेडी ने राज्य में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर सख्त भू-कानून लागू करने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड की जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी प्रावधान जरूरी हैं। दल बाहरी व्यक्तियों द्वारा जमीनों की अंधाधुंध खरीद पर रोक लगाने के उद्देश्य से मजबूत भू-कानून लागू करने की मांग कर रहा है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों के हितों और पर्वतीय क्षेत्रों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मूल निवास की कटऑफ तिथि 1950 तय करने पर जोर
धरने में मूल निवास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूकेडी ने उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मूल निवास की कटऑफ तिथि 1950 निर्धारित करने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मूल निवास से जुड़े प्रावधानों को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय युवाओं को 80 प्रतिशत रोजगार देने की मांग
प्रदेश में रोजगार के सीमित अवसरों और युवाओं के पलायन के मुद्दे को उठाते हुए यूकेडी ने सरकारी और निजी क्षेत्रों में उत्तराखंड के युवाओं के लिए 80 प्रतिशत नौकरियां आरक्षित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, जिससे उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।
दल ने रोजगार के सवाल को राज्य के भविष्य से जोड़ते हुए स्थानीय युवाओं के कौशल, योग्यता और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर दिया।
पहाड़ों में स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती की सुरक्षा का सवाल
यूकेडी ने पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया है। पार्टी ने पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को बचाने के लिए प्रभावी नीति बनाने की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और खेती से जुड़ी चुनौतियां स्थानीय लोगों के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि सुरक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि गांवों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और पलायन पर भी अंकुश लगाया जा सके।
‘राज्य की अस्मिता से समझौता नहीं करेगी यूकेडी’
धरना स्थल पर मौजूद यूकेडी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जिन सपनों, संघर्षों और शहादतों के आधार पर हुआ था, उन्हें पूरा करने के लिए जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों पर गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है। नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल राज्य की अस्मिता, स्थानीय अधिकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहेगा। पार्टी का कहना है कि भू-कानून, मूल निवास, रोजगार और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास जैसे सवालों पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
यूकेडी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो आंदोलन को ब्लॉक और जिला स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। पार्टी ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में धरने को व्यापक जनांदोलन का रूप देने की रणनीति पर भी काम किया जा सकता है।
फिलहाल हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में जारी अनिश्चितकालीन धरने के जरिए यूकेडी ने राज्य के बुनियादी मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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