पोखरी की माटी का संवेदनशील सपूत चला गया, नैनीताल की वादियां हुईं अश्रुपूरित सरलता, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल छोड़ गए जिला सूचना अधिकारी, जिसे समय भी नहीं मिटा सकेगा

हल्द्वानी/नैनीताल। कुछ लोग सरकारी पद पर आते हैं और जिम्मेदारी निभाकर चले जाते हैं, लेकिन कुछ अपने व्यवहार, संवेदनशीलता और आत्मीयता से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बना लेते हैं, जहां से उनकी विदाई के बाद भी उनकी यादें कभी नहीं जातीं। नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी के असमय निधन ने सूचना विभाग, पत्रकारिता जगत, प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों और उनके परिचितों को भीतर तक झकझोर दिया है। नैनीताल की शांत वादियों से लेकर पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट स्थित पोखरी गांव तक शोक की लहर है।
गंगोलीहाट के पोखरी गांव की माटी से मिले संस्कार उनके व्यक्तित्व में जीवनभर दिखाई दिए। सरलता, निश्छलता, सौम्यता और संवेदनशीलता उनके स्वभाव की पहचान रही। शासकीय सेवा में रहते हुए उन्होंने पद की गरिमा और दायित्वों का निर्वहन तो पूरी निष्ठा से किया ही, साथ ही मानवीय संवेदनाओं को भी कभी पीछे नहीं छोड़ा। यही वजह थी कि जिस भी जिले में उनकी तैनाती हुई, वहां अधिकारी-कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पत्रकार और आम लोग भी उनसे सहज रूप से जुड़ते चले गए।
अल्मोड़ा से चंपावत और नैनीताल तक छोड़ी अमिट छाप
अल्मोड़ा से लेकर चंपावत और नैनीताल तक की उनकी सेवा यात्रा केवल सरकारी जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं रही। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में सूचना तंत्र के संचालन से लेकर सीमांत जनपद चंपावत में प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय बनाने तथा नैनीताल जैसे महत्वपूर्ण जिले में जिला सूचना अधिकारी का दायित्व संभालने तक उन्होंने अपनी कार्यशैली की अलग पहचान बनाई।
उनके लिए सरकारी कार्यालय महज फाइलों, पत्रावलियों और औपचारिकताओं का केंद्र नहीं था। कार्यालय पहुंचने वाले हर व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना और संभव सहयोग का रास्ता तलाशना उनके स्वभाव में शामिल था। दूरदराज से अपनी समस्या लेकर पहुंचा ग्रामीण हो या विभागीय कर्मचारी, उनके व्यवहार में पद का अहंकार नहीं, बल्कि अपनापन नजर आता था।
पत्रकारों के लिए हमेशा खुले रहे कार्यालय के दरवाजे
पत्रकारिता जगत के साथ उनका रिश्ता महज विभागीय औपचारिकताओं तक सीमित नहीं था। पत्रकारों के लिए उनके कार्यालय के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। सरकारी सूचनाओं, प्रेस विज्ञप्तियों और विभागीय कार्यक्रमों के साथ पत्रकार साथियों के व्यक्तिगत और सामाजिक सरोकारों पर भी सहज बातचीत होती थी।
किसी पत्रकार साथी की परेशानी हो अथवा किसी जरूरतमंद की समस्या, वह केवल औपचारिकता निभाकर आगे बढ़ जाने वालों में नहीं थे। अपनी ओर से मदद का रास्ता तलाशना उनकी आदत में शामिल था। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वह मदद का कभी प्रदर्शन नहीं करते थे। किसी की सहायता करने के बाद सामने वाले को एहसान का अहसास न हो, इसका भी पूरा ध्यान रखते थे।
यही मानवीय संवेदनशीलता उन्हें सहकर्मियों, पत्रकारों और आम लोगों के बीच अलग पहचान देती थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
उनके असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वृद्ध मां, जीवनसंगिनी, पिता की छाया से वंचित हुए मासूम बच्चे, भाई-बहन और अन्य परिजन इस आकस्मिक वज्रपात से स्तब्ध हैं। जिस घर में उनकी सहज मुस्कान, आत्मीय बातचीत और स्नेह का वातावरण रहता था, वहां अचानक शोक और सन्नाटे ने जगह ले ली है।
परिजनों और करीबी लोगों के लिए इस अचानक हुई विदाई को स्वीकार करना बेहद कठिन है। ताउम्र दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाले संवेदनशील व्यक्ति के जाने के बाद उनके अपनों की आंखों से बह रहे आंसू इस बिछोह की गहराई बयां कर रहे हैं।
पद और जिम्मेदारियां बदलती हैं, इंसानियत की छाप नहीं
सरकारी सेवा में पद और जिम्मेदारियां समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन किसी व्यक्ति का व्यवहार और उसके द्वारा छोड़ी गई मानवीय छाप वर्षों तक लोगों के बीच जीवित रहती है। उनका जीवन भी इसी बात की मिसाल रहा।
चंपावत, अल्मोड़ा और नैनीताल से लेकर उनके गृहक्षेत्र गंगोलीहाट तक उन्होंने सरलता, शुचिता, कर्तव्यनिष्ठा और अपनत्व की जो पहचान बनाई, वह उन्हें लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रखेगी।
उनके असमय चले जाने से एक संवेदनशील अधिकारी ही नहीं, बल्कि ऐसा इंसान भी खो गया, जो अपने पद से अधिक अपने व्यवहार के लिए जाना जाता था। यही कारण है कि उनके निधन की खबर सुनकर उनसे जुड़े हर व्यक्ति के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है—इतनी जल्दी विदाई क्यों?
पोखरी की माटी का यह दीप अब स्मृतियों में रोशन रहेगा
गंगोलीहाट के पोखरी गांव की माटी ने जिस संवेदनशील सपूत को संस्कार दिए, वह अब अनंत यात्रा पर निकल चुका है। पीछे रह गई है उनकी सौम्य मुस्कान, सहज बातचीत, आत्मीय व्यवहार और लोगों के दुख-दर्द में खड़े रहने की याद।
समय बीत जाएगा, पद और कार्यालय बदल जाएंगे, लेकिन उनसे जुड़े लोगों की स्मृतियों में उनकी मानवीय छवि हमेशा जीवित रहेगी। पोखरी की माटी का यह संवेदनशील दीप भले ही बुझ गया हो, लेकिन उसकी रोशनी उन तमाम लोगों के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी, जिनके जीवन को उन्होंने अपने व्यवहार और संवेदनशीलता से छुआ।
रविवार सुबह आठ बजे निकलेगी शवयात्रा
दिवंगत जिला सूचना अधिकारी की शवयात्रा रविवार सुबह आठ बजे हल्द्वानी स्थित उनके आवास से निकाली जाएगी। इसके बाद चित्राशिला घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनके असमय निधन से सूचना विभाग और पत्रकारिता जगत में गहरा शोक है। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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