नैनीताल में राजस्व मामलों के निस्तारण में तेजी: एक साल में 31,979 वाद निपटे, प्रवर्तन के 97.67% प्रकरणों का समाधान

नैनीताल। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के एक वर्ष के कार्यकाल से जुड़े प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक विभिन्न न्यायालयों में 37,383 वाद विचाराधीन रहे। इनमें से 31,979 का निस्तारण किया गया, जबकि 5,404 वाद शेष रहे। इस अवधि में निस्तारण दर 85.54 प्रतिशत दर्ज की गई।

राजस्व प्रवर्तन समिति के तहत 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक कुल 5,745 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें 5,603 पहले से लंबित और 142 नए मामले शामिल थे। कुल 5,611 प्रकरणों का निस्तारण हुआ और 134 शेष रहे। इस तरह दर्ज मामलों में निस्तारण दर करीब 97.67 प्रतिशत रही।

अतिक्रमण और रास्तों से जुड़े अधिकांश मामले निपटे

मार्गों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के 857 मामलों में से 856 का निस्तारण किया गया। सिंचाई गूलों पर अतिक्रमण के 83 मामलों में से 78 निपटे और पांच लंबित रहे। मार्ग निर्माण में बाधा से जुड़े 71 मामलों में से 70 का समाधान हुआ। सार्वजनिक रास्तों और नहरों में अतिक्रमण के सभी 100 मामलों के निस्तारण की जानकारी दी गई है।

भूमि पैमाइश के 2,491 मामलों में से 2,398 का निस्तारण हुआ, जबकि 93 लंबित रहे। मेड़ और खेतों की सीमा से जुड़े 957 मामलों में से 945 निपटे और 12 शेष रहे। कुर्री नक्शों के 131 मामलों में से 117, नाम संशोधन के 290 में से 284 और अन्य श्रेणी के 765 में से 763 मामलों का निस्तारण किया गया।

कलेक्टर न्यायालय में 364 वाद निस्तारित

न्यायालय कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, नैनीताल में राजस्व वर्ष के दौरान दर्ज 472 वादों में से 364 का निस्तारण किया गया। इस श्रेणी में निस्तारण दर 77.11 प्रतिशत रही और 108 वाद शेष रहे। उपलब्ध विवरण में जेडए एवं एलआर अधिनियम, गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट, उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम और शस्त्र अधिनियम सहित विभिन्न कानूनों के मामले शामिल हैं।

चौपालों के जरिए 34,897 वारिसों के नाम दर्ज

ग्रामीण क्षेत्रों में विरासत दर्ज कराने के लिए लगाई गई चौपालों के तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार, 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक मृतक खातेदारों की विरासत दर्ज करने के लिए 9,783 प्रकरण दर्ज हुए। खातों में विरासत दर्ज कराने से संबंधित 18,906 खातों का विवरण दिया गया है। प्रशासन के आंकड़ों में 34,897 वारिसों और लाभार्थियों के नाम दर्ज किए जाने की जानकारी भी शामिल है।

इन आंकड़ों में नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढूंगी, लालकुआं, धारी, खनस्यूं, श्री कैंचीधाम और बेतालघाट तहसीलें शामिल हैं। विरासत प्रविष्टियों से राजस्व अभिलेखों में उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

जारी आंकड़े राजस्व वादों, भूमि पैमाइश, सीमांकन, अतिक्रमण और विरासत दर्ज कराने से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की तस्वीर पेश करते हैं। विभिन्न श्रेणियों में बड़ी संख्या में प्रकरण निस्तारित हुए, जबकि कुछ मामले अब भी लंबित हैं।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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