जल जीवन मिशन की 10 साल पुरानी पेयजल पाइपलाइनों की जांच की मांग, करोड़ों के खर्च का हिसाब मांगा; ग्रामीणों के घरों में आज तक नहीं पहुंचा पानी!
हेमंत सिंह गोनिया ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्य सचिव, पेयजल सचिव, जिलाधिकारी और सांसद को रजिस्ट्री डाक से भेजे शिकायती पत्र; मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी उठाया मामला, आठ ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर दर्ज कराई पेयजल समस्या।

नैनीताल। ओखलकांडा विकासखंड की ग्रामसभा गोनियारों में जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पेयजल पाइपलाइनों और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया ने पिछले 10 वर्षों में बिछाई गई पेयजल पाइपलाइनों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल, मुख्य सचिव उत्तराखंड, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव, जिलाधिकारी नैनीताल तथा सांसद अजय भट्ट को रजिस्ट्री डाक से शिकायती पत्र भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।

शिकायत में पिछले 10 वर्षों के दौरान ग्रामसभा में बिछाई गई पाइपलाइनों की वास्तविक स्थिति की जांच कराने, स्वीकृत बजट और खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने तथा निर्माण कार्यों का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने पांच करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति अथवा खर्च होने की आशंका जताते हुए इसकी वास्तविकता की निष्पक्ष जांच कराने को कहा है।

पाइपलाइन बिछी, लेकिन घरों में पानी नहीं!
शिकायत के अनुसार, कई घरों के बाहर पाइपलाइन बिछा दी गई है, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। कहीं पाइपलाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं कार्य की गुणवत्ता और पुराने पाइपों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों की ओर से पाइपलाइन की तस्वीरें भी उपलब्ध कराई गई हैं।
जल जीवन मिशन के सूचना बोर्ड पर योजना की लागत 225.65 लाख रुपये दर्ज है। बोर्ड के अनुसार ग्रामसभा की स्वीकृति 29 अगस्त 2020, तकनीकी स्वीकृति 24 सितंबर 2021, कार्यादेश 25 मार्च 2022, कार्य प्रारंभ 26 मार्च 2022 तथा कार्य पूर्ण करने की निर्धारित तिथि 25 दिसंबर 2022 अंकित है। निर्धारित समय बीतने के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिलने की शिकायत पर योजना की वास्तविक स्थिति की जांच की मांग की गई है।
शिकायती पत्र में उठाई गईं प्रमुख मांगें
– पिछले 10 वर्षों में बिछाई गई सभी पेयजल पाइपलाइनों की तकनीकी जांच कराई जाए।
– पाइपलाइन की वास्तविक लंबाई, गहराई और गुणवत्ता का मौके पर सत्यापन हो।
– पाइपों की खरीद, आपूर्ति, बिल-वाउचर और भुगतान का मिलान किया जाए।
– यह जांच हो कि नई पाइपलाइन के नाम पर कहीं पुराने पाइपों का इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
– प्रत्येक तोक और घर का सर्वेक्षण कर पता लगाया जाए कि किन परिवारों को पानी मिल रहा है और किन्हें नहीं।
– अधूरी पाइपलाइनों, लीकेज और खराब निर्माण कार्यों की जांच हो।
– स्वीकृत धनराशि, टेंडर, कार्यादेश, माप पुस्तिका और वास्तविक खर्च के अभिलेखों की जांच हो।
– संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जाए।
– अनियमितता या गलत भुगतान प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई और धनराशि की वसूली हो।
– जांच टीम गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की मौजूदगी में स्थलीय निरीक्षण करे और समयबद्ध रिपोर्ट उपलब्ध कराए।
आठ ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर उठाई आवाज
शिकायत पत्र में ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी शामिल हैं। पत्र में दर्ज नामों के अनुसार तोक सिमली से श्री मोहन सिंह, श्री नारायण सिंह और श्री टीकम सिंह तथा तोक तल्ली तोक से श्री माधव सिंह, श्री त्रिलोक सिंह, श्री विजय सिंह, श्री पान सिंह और श्री कुशल सिंह ने हस्ताक्षर किए हैं। इन ग्रामीणों ने भी पेयजल समस्या को अधिकारियों के सामने रखा है।
हेमंत गोनिया ने उठाई जवाबदेही तय करने की मांग
हेमंत सिंह गोनिया ने मांग की है कि जांच केवल विभागीय कागजी रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि अधिकारियों की टीम गांव में जाकर पाइपलाइन और घरों में पानी की वास्तविक स्थिति की जांच करे। योजना की स्वीकृति से लेकर निर्माण, निरीक्षण और भुगतान तक जिम्मेदार अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं की भूमिका की पड़ताल की जाए। यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग, घटिया निर्माण, गलत भुगतान या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नियमित पेयजल पहुंचाना है। केवल पाइपलाइन बिछा देना योजना की सफलता नहीं है। जब तक ग्रामीणों के घरों में पानी नहीं पहुंचेगा, तब तक योजना का वास्तविक लाभ लोगों को नहीं मिलेगा। अब संबंधित अधिकारियों से यह अपेक्षा है कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।







