आरटीआई में बड़ा खुलासा: हल्द्वानी तहसील के रिकॉर्ड में करोड़ों के सरकारी खर्च का हिसाब, कई सूचनाओं पर कहा- ‘रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’

मेडिकल प्रतिपूर्ति के बिल मिले, IFMS बजट रजिस्टर में 2020 से 2026 तक का वर्षवार खर्च सामने; स्थानांतरण, संपत्ति अनुमति और अनुशासनात्मक कार्रवाई के रिकॉर्ड पर सवाल

हल्द्वानी। तहसील हल्द्वानी से जुड़ी एक आरटीआई ने प्रशासनिक और वित्तीय रिकॉर्ड पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया द्वारा 10 बिंदुओं पर मांगी गई सूचना के जवाब में तहसील कार्यालय ने अहम दस्तावेज तो उपलब्ध कराए हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ‘रिकॉर्ड तहसील स्तर पर उपलब्ध / धारित नहीं है’ कहकर पल्ला झाड़ लिया है।

आरटीआई में तहसील में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या, पदवार विवरण, मेडिकल प्रतिपूर्ति, सेवा पुस्तिका, स्थानांतरण, वाहन-मकान-भूमि के लिए विभागीय अनुमति, संपत्ति विवरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

जवाब में कार्यालय ने कुल 74 अधिकारी-कर्मचारियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है और उनकी सेवा पुस्तिकाएं कार्यालय में सुरक्षित होने की बात कही है।

मेडिकल प्रतिपूर्ति का पूरा हिसाब सामने
आरटीआई के जवाब में कर्मचारियों को हुए मेडिकल भुगतान से जुड़े अभिलेख भी दिए गए हैं। इनमें अस्पताल, उपचार और भुगतान से जुड़ी प्रविष्टियां दर्ज हैं, जिससे अब प्रत्येक क्लेम का उसके मूल बिल, स्वीकृति आदेश और वाउचर से मिलान किया जा सकेगा।

सबसे बड़ा पहलू – IFMS बजट रजिस्टर ने खोला खर्च का चिट्ठा
तहसील ने 2020-21 से लेकर 19 सितंबर 2026 तक का IFMS Budget Register उपलब्ध कराया है। इसमें Released Amount, Expenditure और Balance का वर्षवार विवरण है।

दस्तावेजों के अनुसार मोटा-मोटा हिसाब इस प्रकार है:
वित्तीय वर्ष –  जारी राशि  –  कुल व्यय           –            बैलेंस

2020-21 – ₹9.93 लाख    – ~₹6.01 करोड़ – ~ -₹5.91 करोड़
2021-22 – ₹10.16 लाख  – ~₹7.49 करोड़ – ~ -₹7.39 करोड़
2022-23 – ₹22.59 लाख  – ~₹6.52 करोड़ – ~ -₹6.29 करोड़
2023-24 – ~₹34 लाख    – ~₹6.88 करोड़ – ~ -₹6.54 करोड़
2024-25 – ₹33.17 लाख  – ~₹9.71 करोड़ – ~ -₹9.38 करोड़
2025-26 – ₹31.26 लाख  – ~₹8.16 करोड़ – ~ -₹7.85 करोड़
2026-27 – [19 सितंबर 2026 तक] – ₹19.10 लाख – ₹4.06 करोड़ – ~ -₹3.87 करोड़

इन तालिकाओं में कई वर्षों में जारी राशि से कई गुना अधिक व्यय और लगातार निगेटिव बैलेंस दिख रहा है। यह अपने आप में गबन या अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि इन प्रविष्टियों का मूल बजट आवंटन, पूर्व शेष, वेतन मद में केंद्रीय भुगतान, समायोजन और IFMS पोर्टल की एंट्री से गहन मिलान किया जाना जरूरी है।

कई रिकॉर्ड पर तहसील ने खड़े किए हाथ
आरटीआई में पूछा गया था कि कितने कर्मचारी लंबे समय से एक ही जगह जमे हैं, स्थानांतरण नियमों का पालन हुआ या नहीं, किसने वाहन-मकान-भूमि के लिए अनुमति ली और किसने अपनी संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया।

इस पर तहसील कार्यालय का जवाब था कि स्थानांतरण की कार्रवाई जिलाधिकारी कार्यालय, नैनीताल स्तर से होती है और कई अन्य रिकॉर्ड तहसील स्तर पर धारित नहीं हैं। इसी तरह बिना अनुमति संपत्ति अर्जित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े बिंदुओं पर भी पूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।

अब प्रथम अपील की तैयारी
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया का कहना है, “सूचना का अधिकार सिर्फ औपचारिक जवाब देना नहीं है। अगर रिकॉर्ड दूसरे लोक प्राधिकारी के पास है तो धारा 6(3) के तहत उसे ट्रांसफर करना चाहिए था। अब जिन बिंदुओं पर ‘रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’ कहा गया है, उनकी प्रमाणित प्रतियों के लिए प्रथम अपील दायर की जाएगी। साथ ही पूछा जाएगा कि वह रिकॉर्ड वास्तव में किस शाखा में संधारित होता है।”

उन्होंने कहा कि IFMS में जारी राशि और व्यय के बीच भारी अंतर पर संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि ये प्रविष्टियां किस वित्तीय प्रावधान के तहत हुई हैं। बिना मूल बिल-वाउचर के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

यह आरटीआई अब तहसील हल्द्वानी के प्रशासनिक सिस्टम और सरकारी धन के उपयोग की विस्तृत जांच का आधार बन गई है।

 


Advertisements

गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

You cannot copy content of this page