अंकिता के माता-पिता के दिल्ली कूच से उत्तराखंड के खुफिया तंत्र में हलचल! LIU इंस्पेक्टर सरदेव सिंह निलंबित

दिल्ली में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे अंकिता के माता-पिता के प्रदर्शन की भनक समय पर नहीं लगने पर कार्रवाई; खुफिया व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

देहरादून | मानस दर्पण न्यूज़ पोर्टल

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अंकिता के माता-पिता के दिल्ली में प्रदर्शन करने के घटनाक्रम के बाद पुलिस के खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। इस मामले में पौड़ी गढ़वाल की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के निरीक्षक सरदेव सिंह को निलंबित किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड के डीजी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार ने निलंबन की पुष्टि की है।

दिल्ली में प्रदर्शन से कैसे बढ़ी हलचल?

अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट क्षेत्र में प्रदर्शन करने पहुंचे थे। अक्टूबर के मध्य में हुए इस प्रदर्शन में मामले की जांच और कथित वीआईपी से जुड़े सवालों को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई गई।

प्रदर्शन को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के अन्य नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे। बाद में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान अंकिता के माता-पिता और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

LIU इंस्पेक्टर पर कार्रवाई क्यों?

18 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, अंकिता के माता-पिता के दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करने की सूचना समय पर नहीं मिल पाने को विभागीय चूक के रूप में देखा गया। इसी संदर्भ में पौड़ी गढ़वाल के LIU निरीक्षक सरदेव सिंह को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में निलंबन के विस्तृत आधार, विभागीय जांच की स्थिति और संबंधित अधिकारी का पक्ष विस्तार से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि पूरी घटना के लिए किसी एक अधिकारी की जिम्मेदारी अंतिम रूप से निर्धारित हो चुकी है।

अंकिता भंडारी प्रकरण फिर चर्चा के केंद्र में

सितंबर 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी जिले में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। वह ऋषिकेश क्षेत्र के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। इस मामले में दोषियों को सजा मिलने के बाद भी कथित वीआईपी की भूमिका और उससे जुड़े सवालों को लेकर परिवार तथा विभिन्न संगठनों की ओर से आवाज उठती रही है।

अंकिता के माता-पिता की हालिया मांगों और दिल्ली में हुए प्रदर्शन ने मामले को फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। कथित वीआईपी से संबंधित आरोपों और दावों को जांच के निष्कर्षों से अलग समझना जरूरी है; किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करते।

अब आगे क्या?

LIU निरीक्षक का निलंबन खुफिया सूचना संकलन और अधिकारियों की जवाबदेही पर चर्चा को तेज कर सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय जांच में सूचना तंत्र की चूक के क्या कारण सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


Advertisements

गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

You cannot copy content of this page