मरीजों के मसीहा हैं नैनीताल के सीएमओ डॉ. हरीश चन्द्र पंत

मिलनसार व्यक्तित्व और सेवा भाव से बनाई अलग पहचान, हर शनिवार रामनगर में करते हैं ओपीडी व ऑपरेशन

नैनीताल नैनीताल जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरीश चन्द्र पंत अपनी कार्यशैली, सरल स्वभाव और मरीजों के प्रति समर्पण भावना के कारण स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि आमजन के बीच भी विशेष पहचान रखते हैं। उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे में एक कुशल सर्जन और संवेदनशील अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. पंत का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण की मिसाल माना जाता है।
डॉ. हरीश चन्द्र पंत का जन्म 6 अक्टूबर 1970 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्वर्गीय पूरन चन्द्र पंत एवं स्वर्गीय श्रीमती कमला पंत के परिवार में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर में प्राप्त करने के बाद उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की तथा वर्ष 1988 में एमएस (सर्जरी) की उपाधि हासिल की।
वर्ष 1997 में उन्होंने राजकीय सेवा में कदम रखा। उनकी पहली नियुक्ति उत्तराखंड के धौलादेवी क्षेत्र में हुई। इसके बाद उन्होंने दन्या, फूटमूंगा, कालाढूंगी, रामनगर, पिथौरागढ़ और काशीपुर सहित विभिन्न स्थानों पर बतौर सर्जन अपनी सेवाएं दीं। अपने उत्कृष्ट कार्य और प्रशासनिक क्षमता के बल पर उन्हें मुख्य चिकित्साधिकारी पद पर प्रोन्नत किया गया, जहां उनकी पहली तैनाती पिथौरागढ़ के सीएमओ के रूप में हुई। वर्ष 2024 से वह नैनीताल जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
डॉ. पंत का पारिवारिक जीवन भी बेहद सादगीपूर्ण और प्रेरणादायक है। वर्ष 1999 में उनका विवाह डॉ. चन्द्रा पंत से हुआ। ईश्वर ने इस दम्पत्ति को वात्सल्य पंत के रूप में पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया, जो वर्तमान में देहरादून से एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले डॉ. हरीश पंत “जियो और जीने दो” की सोच के साथ जीवन जीते हैं। बेहद मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी डॉ. पंत आज के भौतिकवादी दौर में भी मानवता और सेवा भाव को सर्वोपरि मानते हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर होने के बावजूद वह प्रत्येक शनिवार को रामनगर संयुक्त चिकित्सालय में स्वयं ओपीडी देखने के साथ-साथ ऑपरेशन भी करते हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए रामनगर पहुंचते हैं।
इस संबंध में पूछे जाने पर डॉ. पंत कहते हैं कि मरीजों के प्रति समर्पण भावना ही उन्हें मानवता से जोड़े रखती है। उनका मानना है कि चिकित्सक का व्यवहार हमेशा संवेदनशील होना चाहिए और यही कारण है कि उनके अंदर कभी “कड़क अधिकारी” वाली छवि विकसित नहीं हो पाई।
डॉ. पंत एक कुशल चिकित्सक होने के साथ-साथ एक सफल प्रशासक भी हैं। आमजन, मीडिया, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और लोकप्रियता उनकी कार्यशैली का परिणाम है। विभागीय अधीनस्थ भी उन्हें बेहद सम्मान देते हैं और उनकी टीम भावना के कारण पूरा स्टाफ उनके साथ मजबूती से खड़ी नजर आता है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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