भाजपा ने ठगी नही, कांग्रेस के विरोध के बावजूद बनाया राम मन्दिर: चौहान

सनातन राष्ट्र विरोधी आचरण वाली कांग्रेस का बदला रुख हैरतंगेज: चौहान

देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस का सनातन अथवा सिंदूर सैन्य ऑपरेशन के बारे मे जतायी जा रही चिंता हैरतंगेज है और उसके मूल स्वरूप को जनता बेहतर ढंग से जानती है। भाजपा ने जनता को ठगा नही, बल्कि देश के करोड़ो आस्थावान सनातनी लोगों की कई दशकों पुरानी उस इच्छा को राम मँदिर के निर्माण को पूरा किया है,जिसके रास्ते मे कांग्रेस लगातार रोड़े अटका रही थी।

चौहान ने कहा कि राम मन्दिर ट्रस्ट मे घपले को लेकर एसआईटी जांच चल रही है और आरोपियों पर कड़ी जांच चल रही है। लेकिन कांग्रेस इसे अवसर मानकर सनातन को बदनाम करने के लिए एजेंडा चला रही है। लेकिन उसे इसका कोई लाभ नही होने वाला है। क्योकि जनता कांग्रेस के तुष्टिकरण और राम मन्दिर निर्माण के लिए दशकों तक रोड़े अटकने वाली साजिश से वाक़िफ़ है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से तो राम लला के दर्शन मे भी दूरी बनायी गयी कि कहीं उससे कैडर अल्पसंख्यक वोट न छिटक जाए। उन्होंने कहा कि मन्दिर के संसाधनों पर किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नही की जायेगी। हालांकि कांग्रेस की चिंता हास्यास्पद है, क्योकि मन्दिर विरोधी किस तरह सक्रिय हुए है यह समझा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ मन्दिर मे सोना चोरी के आरोप कांग्रेस के पुराने है, लेकिन उसके आरोप जांच मे साबित नही हो पाए है। कांग्रेस ऑपरेशन सिंदूर पर भारतीय सेना के पराक्रम पर सवाल उठाती रही है और जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान मे आतंकियों पर प्रहार किये तो कांग्रेस सैन्य कार्रवाई की जरूरत पर ही सवाल उठाती रही। कितने विमान गिरे इसे लेकर दुश्मनों के सुर मे सुर मिलाती रही। आज कांग्रेस सैनिको की शहादत को लेकर फिक्र जता रही है। जनता को कांग्रेस के हर सैन्य ऑपरेशन मे सुबूत मांगने की बात पता है और समय पर जवाब देगी।

चौहान ने कहा कि सनातन अथवा सैन्य कार्यवाही पर कांग्रेस के चरित्र समय समय पर सामने आता रहा है। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों मे देश के खिलाफ कांग्रेस से उठने वाली आवाज उसके रीति, नीति और संस्कार को भली भाँति उसके चेहरे को उजागर करती रही है। कांग्रेस को जनता की ओर से एक बड़ा झटका लगने वाला है यह निश्चित है, क्योकि अफवाह की राजनीति से बजूद को नही बचाया जा सकता है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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