17वीं बार न्यायिक दूरी: IFS संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामले की सुनवाई से CAT के जज राजवीर सिंह वर्मा अलग

नई दिल्ली/देहरादून, 28 सितंबर 2026। उत्तराखंड कैडर के चर्चित भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में न्यायिक स्तर पर एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के सदस्य (न्यायिक) राजवीर सिंह वर्मा ने चतुर्वेदी की एक याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। इसके साथ ही पिछले करीब 13 वर्षों में उनके अलग-अलग मामलों से स्वयं को अलग करने वाले न्यायिक अधिकारियों की संख्या 17 बताई जा रही है।
21 सितंबर के आदेश में दर्ज हुआ Recusal
मामला उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के उस आदेश से संबंधित है, जिसमें भारतीय वन सेवा अधिकारियों की Annual Performance Appraisal Report (APAR) से संबंधित प्रक्रिया/चैनल निर्धारित किया गया था। चतुर्वेदी ने इस आदेश को चुनौती दी है और अपनी याचिका में मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया है।
CAT दिल्ली पीठ के 21 सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज किया गया कि मामले पर कुछ समय सुनवाई के बाद राजवीर सिंह वर्मा, सदस्य (न्यायिक), ने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके बाद रजिस्ट्री को मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
अलग होने का कारण आदेश में नहीं बताया गया
इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उपलब्ध आदेश में न्यायमूर्ति वर्मा के मामले से अलग होने का कोई विशिष्ट कारण दर्ज नहीं है। इसलिए केवल Recusal के आधार पर किसी संभावित कारण या हित-संघर्ष का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चतुर्वेदी स्वयं मामले में पेश हुए और APAR से संबंधित नियमों तथा उत्तराखंड सरकार के 29 नवंबर 2021 के संचार का हवाला दिया।
17 न्यायिक अधिकारियों में कौन-कौन शामिल?
रिपोर्टों के अनुसार अब तक अलग-अलग मामलों में:
- 2 सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
- 4 उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश
- 9 CAT सदस्य/न्यायिक अधिकारी
- 2 जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश
चतुर्वेदी से संबंधित विभिन्न मामलों की सुनवाई से अलग हो चुके हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये 17 अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियों से जुड़े Recusal हैं, न कि एक ही मामले में 17 न्यायाधीशों का हटना।
सिलसिला 2013 से जारी रहा है
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह सिलसिला नवंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के एक मामले से अलग होने से शुरू हुआ बताया जाता है। बाद में अगस्त 2016 में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस यू.यू. ललित ने भी चतुर्वेदी से संबंधित एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था।
उत्तराखंड हाईकोर्ट में भी अलग-अलग समय पर न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, मनोज तिवारी, आलोक वर्मा और रविंद्र मैठाणी के Recusal का उल्लेख रिपोर्टों में मिलता है। 2025 में आलोक वर्मा और रविंद्र मैठाणी से जुड़े Recusal contempt petition की कार्यवाही से संबंधित बताए गए हैं।
17 न्यायिक अधिकारियों के अलग होने के पीछे एक समान कारण स्थापित नहीं है। अलग-अलग मामलों में परिस्थितियां अलग रही हैं और कई आदेशों में कारण दर्ज नहीं किया गया। इसलिए इस संख्या को किसी एक कारण, विवाद या निष्कर्ष से जोड़ना तथ्यों से परे होगा।
यह घटनाक्रम इसलिए चर्चा में है क्योंकि संजीव चतुर्वेदी से संबंधित विभिन्न सेवा, प्रतिनियुक्ति, अनुशासनात्मक कार्रवाई, APAR और अन्य मामलों में वर्षों के दौरान कई न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई से स्वयं को अलग किया है। अब CAT दिल्ली पीठ के राजवीर सिंह वर्मा के Recusal के बाद यह संख्या 17 बताई जा रही है। हालांकि, Recusal अपने आप में किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता और इसके कारणों के बारे में अनुमान लगाना उचित नहीं है।






