₹210 करोड़ की संपत्ति का आरोप, दूसरी ओर जान का खतरा! उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य और पति गिरधारी साहू के बीच आर-पार की जंग
पति ने मंत्री पर लगाया कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप, रेखा आर्य ने एफआईआर में मारपीट और हत्या की साजिश का किया दावा; दोनों पक्षों के आरोपों की जांच पर टिकी निगाहें

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति पर मारपीट, उत्पीड़न और जान से मारने की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्य पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। इस विवाद ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
एफआईआर के बाद पति का पलटवार
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के गढ़ी कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने कथित मारपीट, उत्पीड़न, धोखाधड़ी, जालसाजी और जान से मारने की साजिश समेत कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपनी और अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।
रेखा आर्य ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

₹210 करोड़ की संपत्ति को लेकर साहू का दावा
16 अक्टूबर को सामने आए वीडियो में गिरधारी लाल साहू ने अपनी पत्नी पर करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी जांच कराने की अपील की।
साहू ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी फर्जी और एआई से तैयार किया गया बताया। इस प्रकार दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर दावे किए गए हैं।
राजनीतिक और कानूनी सवालों के बीच मामला
इस प्रकरण ने कई अहम सवाल खड़े किए हैं। क्या ₹210 करोड़ की कथित संपत्ति के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी? क्या रेखा आर्य की ओर से प्रस्तुत ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी? और पुलिस दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकालती है?
इन सवालों के जवाब जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल, आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।







