हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने के फैसले को चुनौती वाली याचिका खारिज, नैनीताल में ही सुनवाई की व्यवस्था पर फिलहाल विराम

उत्तराखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला—बेलबाबा क्षेत्र में हाईकोर्ट के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज की

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलवाला क्षेत्र में स्थानांतरित करने तथा इसके लिए भूमि आरक्षित किए जाने के मामले में दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने और केंद्र सरकार की अनुमति के बिना आरक्षित वन भूमि के अधिग्रहण के निर्णय को चुनौती दी गई थी।

मामले में कोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से आगे सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी की जा रही है।

आरक्षित वन भूमि के इस्तेमाल पर उठे थे सवाल

याचिका में मुख्य रूप से हल्द्वानी क्षेत्र में हाईकोर्ट की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर आपत्ति जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, हल्द्वानी के बेलवाला मंदिर के पास आरक्षित वन भूमि का प्रस्ताव सामने आया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस भूमि के संबंध में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 की धारा-2 के प्रावधानों का पालन किए बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि आरक्षित वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक केंद्रीय स्वीकृति का पालन किया जाना जरूरी है।

नैनीताल में हाईकोर्ट की पहचान और भविष्य को लेकर बहस

उत्तराखंड हाईकोर्ट की स्थापना नैनीताल में होने के बाद से ही हाईकोर्ट को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का मुद्दा समय-समय पर चर्चा में रहा है। हल्द्वानी में हाईकोर्ट के लिए नई जगह विकसित किए जाने की संभावनाओं के बीच पर्यावरण, वन भूमि, प्रशासनिक सुविधा और नैनीताल की ऐतिहासिक पहचान जैसे मुद्दे भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।

इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब निगाहें याचिकाकर्ता की संभावित अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है, तो हाईकोर्ट के स्थानांतरण और प्रस्तावित भूमि के उपयोग से जुड़े कानूनी एवं पर्यावरणीय पहलुओं पर आगे भी महत्वपूर्ण सुनवाई हो सकती है।

क्या है पूरा विवाद?

  • उत्तराखंड हाईकोर्ट वर्तमान में नैनीताल में स्थित है।
  • हाईकोर्ट को हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव विवाद का विषय बना।
  • प्रस्तावित भूमि को लेकर आरक्षित वन भूमि के उपयोग पर सवाल उठाए गए।
  • याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार की आवश्यक अनुमति और वन कानूनों के अनुपालन का मुद्दा उठाया।
  • हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
  • अब याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।

यह मामला केवल हाईकोर्ट की इमारत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने तक सीमित नहीं है। इसके साथ न्यायिक संस्थान की पहुंच, नैनीताल की ऐतिहासिक पहचान, हल्द्वानी की भौगोलिक एवं परिवहन सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और वन भूमि के वैधानिक उपयोग जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं।

हाईकोर्ट के ताजा निर्णय के बाद फिलहाल याचिका खारिज हो गई है, लेकिन यदि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो यह विषय एक बार फिर न्यायिक परीक्षण के केंद्र में आ सकता है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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