मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सख्ती: बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
आयोग सदस्य योगेश सिंह रजवार ने वन विभाग को दिए ठोस सुरक्षा उपायों के निर्देश, संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर लाइट, फेंसिंग और 24×7 रेस्क्यू व्यवस्था पर जोर

नैनीताल, 07 सितंबर 2026। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने और आम नागरिकों, विशेषकर विद्यालय आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर नैनीताल में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। नैनीताल स्थित जी.बी. पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में आयोजित बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश सिंह रजवार ने की।
बैठक में श्री रजवार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर लाइट और फेंसिंग पर जोर
आयोग सदस्य ने वन एवं ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार सोलर लाइट लगाने, फेंसिंग कराने तथा विद्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
बंदरों की समस्या के समाधान के लिए अभियान चलाने की मांग
बैठक में नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती बंदरों की समस्या पर भी चर्चा हुई। श्री रजवार ने कहा कि वानर बंध्याकरण कार्यक्रम को योजनाबद्ध तरीके से अभियान के रूप में संचालित किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को बंदरों की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
ग्रामीणों और विद्यार्थियों को किया जाए जागरूक
श्री रजवार ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और विद्यार्थियों को वन्यजीवों के व्यवहार, उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने, वन्यजीव दिखाई देने पर बरती जाने वाली सावधानियों और आपात स्थिति में वन विभाग को तत्काल सूचना देने की जानकारी दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान केवल रेस्क्यू ऑपरेशन तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए सुरक्षात्मक उपाय, जन-जागरूकता और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
CSR से गांवों में मजबूत हो सकती है सुरक्षा व्यवस्था
आयोग सदस्य ने जमरानी परियोजना के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्थानों पर सोलर लाइट, फेंसिंग और रेस्क्यू वाहन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी पहल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
24×7 रेस्क्यू टीम और आधुनिक उपकरणों की जरूरत
आगामी सीजन में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित घटनाओं को देखते हुए श्री रजवार ने रेस्क्यू टीमों में अतिरिक्त कार्मिकों की तैनाती और उन्हें 24×7 उपलब्ध रखने पर जोर दिया।
उन्होंने रेस्क्यू टीमों को आधुनिक एवं हाईटेक उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि टीमों के पास नाइट विजन कैमरे, जीपीएस, आधुनिक संचार उपकरण, ट्रैंक्विलाइजिंग उपकरण, प्राथमिक उपचार किट, पिंजरे और आवश्यक सुरक्षा सामग्री पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए।
उन्होंने विभागीय नियंत्रण कक्ष और रेस्क्यू टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती पर भी जोर दिया।
वन विभाग के प्रयासों की सराहना
बैठक में आयोग सदस्य योगेश सिंह रजवार ने नैनीताल वन प्रभाग द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और रेस्क्यू कार्यों के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि विभागीय समन्वय और आधुनिक संसाधनों के माध्यम से संघर्ष की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बैठक में उप वन संरक्षक आकाश गंगवार, उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चंद, उप प्रभागीय वनाधिकारी शशि देव, वन क्षेत्राधिकारी नितिन पंत, वन क्षेत्राधिकारी विजय मेलकानी सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।
‘बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी’
बैठक के समापन पर योगेश सिंह रजवार ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के साथ-साथ बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक संसाधनों, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता के माध्यम से नैनीताल जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए परिणाममुखी कार्ययोजना पर लगातार काम किया जाएगा।







