काठगोदाम–नैनीताल रोपवे परियोजना को मिलेगी गति, कैंची धाम भी जुड़ेगा नेटवर्क से

हल्द्वानी, 16 सितंबर 2026। काठगोदाम से हनुमानगढ़ी और कैंची धाम को रोपवे से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए बुधवार को सर्किट हाउस, काठगोदाम में प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना की प्रगति, तकनीकी अध्ययन, भूमि हस्तांतरण, पार्किंग और यातायात प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

बैठक में सचिव लोक निर्माण विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं आयुष डॉ. पंकज कुमार पांडेय तथा सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने भी प्रतिभाग किया।

14.9 किलोमीटर लंबा होगा मुख्य रोपवे

नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन ने बताया कि प्रस्तावित काठगोदाम–नैनीताल रोपवे की अनुमानित लागत करीब 2,800 करोड़ रुपये है। परियोजना के तहत काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी में स्टेशन प्रस्तावित हैं। मुख्य रोपवे की लंबाई लगभग 14.9 किलोमीटर होगी और इसमें 58 टावर बनाए जाने प्रस्तावित हैं।

प्रस्ताव के अनुसार रोपवे से प्रति घंटे करीब 1,800 यात्री सफर कर सकेंगे। रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक यात्रा लगभग 20 से 25 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। इस मार्ग के लिए एकतरफा किराया 375 रुपये प्रति व्यक्ति प्रस्तावित बताया गया है।

कैंची धाम तक भी पहुंचेगा रोपवे

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। ज्योलीकोट स्टेशन को जंक्शन स्टेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां से कैंची धाम के लिए आगे रोपवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित की गई है।

कैंची धाम पहुंचने वाले देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यह वैकल्पिक परिवहन सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

काठगोदाम में बनेगा फुट ओवर ब्रिज और पार्किंग

परियोजना के तहत काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है, जिससे यात्रियों को रोपवे स्टेशन तक पहुंचने में सुविधा मिल सके। काठगोदाम और आसपास पार्किंग सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है।

प्रमुख सचिव ने रानीबाग में प्रस्तावित स्टेशन स्थल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि यहां करीब 33 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जहां स्टेशन के साथ पार्किंग विकसित करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र को देखते हुए तकनीकी अध्ययन जरूरी

अधिकारियों ने कहा कि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है। इसलिए तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। वन विभाग की भूमि हस्तांतरण से संबंधित कार्यों को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

प्रमुख सचिव ने हनुमानगढ़ी स्टेशन पर संभावित यातायात दबाव को देखते हुए समुचित ट्रैफिक और यात्री प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए। एनएचएलएमएल और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाने को कहा गया।

रोपवे से पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा

प्रस्तावित परियोजना से नैनीताल जाने वाले पर्यटकों को सड़क के अलावा वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। पर्यटन सीजन और सप्ताहांत में काठगोदाम–हल्द्वानी से नैनीताल मार्ग पर वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में रोपवे के संचालन से सड़क यातायात और पार्किंग दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है।

रोपवे से होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, स्थानीय दुकानदार, गाइड और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। निर्माण और संचालन के दौरान तकनीकी सेवाओं, सुरक्षा, टिकटिंग, पार्किंग और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

सड़क निर्माण की तुलना में रोपवे में पूरे पहाड़ी मार्ग को काटकर चौड़ा करने की आवश्यकता कम होती है। साथ ही यदि पर्यटक बड़ी संख्या में निजी वाहनों के स्थान पर रोपवे का उपयोग करते हैं तो ईंधन खपत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने की संभावना भी है।

अधिकारियों ने किया स्थलीय निरीक्षण

बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन, उपजिलाधिकारी मोनिका सहित लोक निर्माण विभाग, विद्युत, वन, सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे.

यदि परियोजना प्रस्तावित रूप में आगे बढ़ती है तो काठगोदाम–रानीबाग–ज्योलीकोट–नैनीताल क्षेत्र के लिए यह केवल परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि पर्यटन, पार्किंग और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के स्वरूप को प्रभावित करने वाला बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट बन सकता है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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