एक साल बाद जागा शिक्षा विभाग! समाजसेवी हेमंत गौनिया को गांधी जयंती पर सेवा का प्रमाणपत्र, शिकायत के बाद घर पहुंचे अधिकारी
गांधी जयंती 2025 पर कोटाबाग के सरकारी स्कूलों में बच्चों को बांटी थी खाद्य सामग्री, 23 अक्टूबर 2026 को मिला सम्मान; प्रमाणपत्र जारी करने में देरी पर उठे सवाल

हल्द्वानी/कोटाबाग। सरकारी विभागों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गांधी जयंती पर सरकारी विद्यालयों के बच्चों के बीच निःशुल्क खाद्य सामग्री वितरित कर सेवा करने वाले समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया को अपने कार्य का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ा। मामला मुख्य शिक्षा अधिकारी तक पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी योगेश्वर पांडे 23 अक्टूबर 2026 को प्रमाणपत्र लेकर उनके घर पहुंचे और उन्हें सौंपे।
जानकारी के अनुसार, 2 अक्टूबर 2025 को गांधी जयंती के अवसर पर हेमंत सिंह गौनिया और उनकी टीम ने कोटाबाग क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बिस्कुट, चॉकलेट, फ्रूटी और नमकीन का निःशुल्क वितरण किया था। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के साथ खुशियां साझा करना और समाजसेवा के माध्यम से गांधी जी के विचारों को आगे बढ़ाना था।
छह विद्यालयों में बच्चों को बांटी गई खाद्य सामग्री
उपलब्ध प्रमाणपत्रों के अनुसार, अलग-अलग विद्यालयों में 70, 60, 30, 23, 18 और 16 बच्चों को खाद्य सामग्री वितरित की गई। इस प्रकार दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कुल 217 बच्चों तक यह सेवा पहुंची।
इस सामाजिक कार्य में हेमंत गौनिया के साथ कई सहयोगियों ने भी योगदान दिया। इनमें अमित रस्तोगी, वंश गौनिया, दिग्विजय देव, अशोक कटारिया, प्रत्युष सिंह, रविशंकर लोहानी, मयंक शर्मा, आर.के. सक्सेना और मुकुल शर्मा शामिल रहे।
शिकायत के बाद घर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रमाणपत्र जारी करने में हुई देरी को लेकर है। गांधी जयंती 2025 पर किए गए सेवा कार्य के प्रमाणपत्र लगभग एक साल बाद, 23 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए। बताया गया है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी से शिकायत किए जाने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी योगेश्वर पांडे प्रमाणपत्र लेकर हेमंत गौनिया के घर पहुंचे।
हालांकि, प्रमाणपत्र जारी करने में देरी के कारणों को लेकर विभाग का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।
समाजसेवा के सम्मान में इतनी देरी क्यों?
यह मामला केवल एक समाजसेवी को प्रमाणपत्र मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से भी जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति या संस्था सरकारी विद्यालयों के बच्चों के हित में स्वेच्छा से योगदान देती है, तो ऐसे कार्यों का समय पर अभिलेखीकरण और प्रमाणन किया जाना अपेक्षित है।







