उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित

हल्द्वानी, 18 अक्टूबर 2026। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के हल्द्वानी स्थित मॉडल अध्ययन केंद्र (16000) में आज जुलाई 2026 सत्र के नवप्रवेशित शिक्षार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली, शैक्षणिक व्यवस्थाओं, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराना था, ताकि वे अपनी अध्ययन यात्रा को बेहतर ढंग से समझते हुए शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता कर सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी द्वारा उद्घाटन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में डॉ. विशाल कुमार शर्मा ने परिचयात्मक सत्र के माध्यम से शिक्षार्थियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के परिचय, उसकी स्थापना एवं शैक्षणिक उद्देश्यों तथा हल्द्वानी स्थित मॉडल अध्ययन केंद्र की भूमिका और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं एवं उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा उन शिक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है, जो व्यक्तिगत, सामाजिक अथवा व्यावसायिक परिस्थितियों के बीच अपनी उच्च शिक्षा जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने शिक्षार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने, तनाव से बचने तथा समय प्रबंधन की आदत विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने नियमित अध्ययन, असाइनमेंट समय पर जमा करने और परीक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने पर भी बल दिया। उन्होंने शिक्षार्थियों को अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहते हुए उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. गिरिजा पांडे ने मुक्त विश्वविद्यालयों के विकास एवं इतिहास की संक्षिप्त जानकारी देते हुए मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की अवधारणा, विशेषताओं और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह शिक्षा प्रणाली विभिन्न परिस्थितियों में शिक्षार्थियों को अपनी सुविधानुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले शैक्षणिक अवसरों और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने नियमित रूप से अपनी ईमेल जाँचने तथा विश्वविद्यालय से प्राप्त होने वाली सूचनाओं और निर्देशों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे महत्वपूर्ण शैक्षणिक अपडेट से वंचित न रहें।
प्रो. जीतेन्द्र पांडे ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से शिक्षार्थियों को मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के अनुरूप अध्ययन करने के लिए तैयार किया। उन्होंने शिक्षार्थियों की सामान्य शंकाओं एवं समस्याओं का समाधान करते हुए स्व-अध्ययन, नियमितता, समयबद्धता और अनुशासन के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा में शिक्षार्थियों की सक्रिय भागीदारी, स्व-अनुशासन तथा अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों का निर्वहन उनकी सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अध्ययन केंद्रों की भूमिका पर आयोजित सत्र में प्रो. एम.एम. जोशी ने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली में अध्ययन केंद्रों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अध्ययन केंद्र शिक्षार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने शिक्षार्थियों को अध्ययन केंद्रों से नियमित संपर्क बनाए रखने तथा उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
प्रवेश संबंधी जानकारी प्रदान करते हुए डॉ. सुमित प्रसाद ने विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया और उससे जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करना, स्टूडेंट वन व्यू (Student One View) पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाओं तक पहुँचना तथा स्व-अध्ययन सामग्री प्राप्त करना समझाया। डॉ. दीपांकुर जोशी ने अध्ययन सामग्री के उत्पादन एवं वितरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षार्थियों से अपने संपर्क विवरण, विशेषकर डाक का पता, मोबाइल नंबर तथा अन्य आवश्यक जानकारी सही एवं अद्यतन रखने का अनुरोध किया, ताकि अध्ययन सामग्री के वितरण में किसी प्रकार की असुविधा या विलंब की स्थिति उत्पन्न न हो।
परीक्षा प्रणाली पर आयोजित सत्र में प्रो. आशुतोष भट्ट ने परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने शिक्षार्थियों को असाइनमेंट जमा करने, परीक्षा आवेदन पत्र भरने, बैक परीक्षा तथा अंक सुधार परीक्षा की प्रक्रिया और परीक्षा परिणामों से संबंधित आवश्यक पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया। इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेश मठपाल ने प्रायोगिक कार्यों एवं कार्यशालाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाठ्यक्रम के व्यावहारिक पक्षों को समझने, सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहार में लागू करने तथा कार्यशालाओं और प्रायोगिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री खेमराज भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से परिचित होने तथा अपनी जिज्ञासाओं के समाधान का अवसर मिला। इस अवसर पर पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से शिक्षार्थियों को अध्ययन एवं पठन-पाठन संबंधी संसाधनों से परिचित होने का अवसर प्राप्त हुआ।
विश्वविद्यालय द्वारा दीक्षारंभ कार्यक्रम को शिक्षार्थी-केंद्रित शैक्षणिक पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने शिक्षार्थियों को मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा की विशेषताओं, शैक्षणिक संसाधनों तथा अध्ययन केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। हल्द्वानी स्थित मॉडल अध्ययन केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद भविष्य में विश्वविद्यालय के अन्य अध्ययन केंद्रों पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के नवप्रवेशित शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक सुविधाओं और अध्ययन संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन की जानकारी प्राप्त हो सके।







