आरटीआई से सामने आए केरल स्टेट वक्फ बोर्ड के आंकड़े, 63,086 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत
1,391 संपत्तियां अतिक्रमण के रूप में रिपोर्ट; UMEED पोर्टल पर 68,805 संपत्तियां दर्ज होने की जानकारी

कोच्चि/हल्द्वानी। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में केरल स्टेट वक्फ बोर्ड से संबंधित कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा केंद्रीय वक्फ परिषद, नई दिल्ली के माध्यम से मांगी गई जानकारी के जवाब में बोर्ड ने वक्फ संपत्तियों, अतिक्रमण, सरकारी अनुदान, बैंक खातों, लीज तथा अन्य अभिलेखों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है।
केरल स्टेट वक्फ बोर्ड के राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं जूनियर सुपरिंटेंडेंट मोहम्मद आसिफ के.ए. की ओर से 18 सितंबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि केंद्रीय वक्फ परिषद से 13 अगस्त 2026 को प्राप्त ई-मेल पत्र संख्या 213 के साथ छह आरटीआई आवेदन बोर्ड को भेजे गए थे।
आरटीआई आवेदनों में पिछले 15 वर्षों से संबंधित वक्फ संपत्तियों, लीज, सरकारी एवं केंद्रीय अनुदान, बैंक खातों, अतिक्रमित संपत्तियों तथा बोर्ड से संबंधित परियोजनाओं की जानकारी मांगी गई थी।
63,086 वक्फ संपत्तियां बोर्ड में पंजीकृत
बोर्ड के जवाब के अनुसार केरल स्टेट वक्फ बोर्ड के अंतर्गत कुल 63,086 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। वहीं, केरल राज्य से संबंधित 68,805 संपत्तियां UMEED पोर्टल पर दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
दोनों आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। दोनों रिकॉर्डों की प्रकृति, अद्यतन स्थिति और डेटा-मिलान की प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद ही अंतर का कारण निर्धारित किया जा सकता है।
1,391 संपत्तियां अतिक्रमण के रूप में रिपोर्ट
आरटीआई जवाब में बोर्ड ने 1,391 वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमित होने के रूप में रिपोर्ट किए जाने की जानकारी दी है। बोर्ड के अनुसार इन संपत्तियों की जिला-वार सूची PDF प्रारूप में उपलब्ध है।
जिला-वार सूची मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अतिक्रमण के रूप में दर्ज संपत्तियां किन जिलों में स्थित हैं और प्रत्येक जिले में इनकी संख्या कितनी है।
राज्य सरकार से ₹40.55 करोड़ से अधिक अनुदान
बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार राज्य सरकार से प्रशासनिक एवं विशेष अनुदान के रूप में कुल ₹40,55,85,000 प्राप्त हुए हैं।
बोर्ड के जवाब में सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए वर्ष 1984-85 से 2023-24 तक प्राप्त विशेष अनुदान की राशि ₹24,78,24,000 बताई गई है।
केंद्र सरकार से ₹4.39 करोड़ से अधिक की सहायता
आरटीआई जवाब के मुताबिक वर्ष 2010-11 से 2024-25 तक केंद्र सरकार से कंप्यूटरीकरण, राज्य वक्फ बोर्ड को मजबूत करने तथा कौमी वक्फ तरक्कियाती योजना/UMEED से संबंधित मदों में कुल ₹4,39,66,277 प्राप्त हुए।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2003-04 से 2023-24 तक प्रशासनिक अनुदान के रूप में ₹15,77,61,000 प्राप्त होने की जानकारी भी जवाब में दी गई है।
आठ कार्यालयों के अलग-अलग बैंक खाते
केरल स्टेट वक्फ बोर्ड ने बताया कि राज्य में मुख्य कार्यालय सहित कुल आठ कार्यालय कार्यरत हैं। इनमें एर्नाकुलम स्थित मुख्य कार्यालय के अलावा तिरुवनंतपुरम, कोट्टायम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड और कन्नूर के मंडलीय कार्यालय तथा कासरगोड एक्सटेंशन काउंटर शामिल हैं।
बोर्ड के अनुसार इन कार्यालयों के अलग-अलग बैंक खाते हैं और संबंधित खातों के ऑडिटेड आय-व्यय विवरण PDF प्रारूप में उपलब्ध हैं।
लीज रिकॉर्ड भी उपलब्ध
आरटीआई जवाब में बोर्ड ने बताया कि उसके द्वारा निष्पादित लीज मामलों से संबंधित रिकॉर्ड PDF प्रारूप में उपलब्ध हैं। साथ ही Waqf Property Lease Rules, 2014 तथा उसके संशोधनों की जानकारी भी उपलब्ध होने की बात कही गई है।
परियोजनाओं के संबंध में जवाब—‘NIL’
बोर्ड द्वारा निष्पादित परियोजनाओं से संबंधित प्रश्न के जवाब में “NIL” दर्ज किया गया है। यानी मांगी गई इस श्रेणी में बोर्ड ने कोई परियोजना दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है।
विस्तृत 15 वर्ष के रिकॉर्ड के लिए निरीक्षण की बात
बोर्ड के राज्य लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि छह आरटीआई आवेदनों में विभिन्न श्रेणियों से संबंधित पिछले 15 वर्षों का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा गया है। ऐसे रिकॉर्ड को खोजने, एकत्र करने और व्यवस्थित करने में कर्मचारियों के कार्य घंटे लगते हैं।
बोर्ड ने आवेदक को पूर्व सूचना देकर कार्यालय आने, संबंधित फाइलों का निरीक्षण करने तथा आवश्यक सूचना और प्रतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।
पंजीकृत संपत्तियों की PDF के लिए ₹75 शुल्क
बोर्ड के पत्र में पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की सूची PDF उपलब्ध कराने के लिए ₹75 कॉपी शुल्क जमा करने की जानकारी दी गई है। पत्र के अनुसार शुल्क इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किया जा सकता है।
हेमंत गौनिया बोले—मांगी गई पूरी सूचना उपलब्ध कराई जाए
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया का कहना है कि उनके द्वारा मांगी गई सूचना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि मूल रिकॉर्ड, जिला-वार संपत्ति सूची, लीज दस्तावेज, अनुदान संबंधी रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, बैंक खातों से संबंधित उपलब्ध अभिलेख तथा अतिक्रमण की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सूचना विस्तृत होने की स्थिति में कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के संबंध में स्पष्ट और बिंदुवार जवाब मिलना चाहिए।
गौनिया के अनुसार, यदि किसी सूचना को उपलब्ध कराने से इनकार किया जाता है तो उसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधान और कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
प्रथम अपील की तैयारी
आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से अब प्रथम अपील किए जाने की तैयारी की जा रही है। इसमें मूल आरटीआई आवेदनों में पूछे गए सभी प्रश्नों का बिंदुवार उत्तर, उपलब्ध दस्तावेजों की प्रतियां, संबंधित सूचियां और ऑडिट रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
विस्तृत रिकॉर्ड होने की स्थिति में निरीक्षण अथवा कानून के तहत उपलब्ध अन्य प्रक्रिया अपनाने का विकल्प भी रखा जाएगा। साथ ही अपील की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस या टेलीफोन के माध्यम से अवसर दिए जाने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
आंकड़ों के बाद दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण
आरटीआई जवाब में सामने आए 63,086 पंजीकृत वक्फ संपत्तियों, UMEED पोर्टल पर दर्ज 68,805 संपत्तियों और 1,391 अतिक्रमण के रूप में रिपोर्ट की गई संपत्तियों के आंकड़े अब आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
हालांकि इन आंकड़ों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित जिला-वार सूची, मूल अभिलेख, रिकॉर्ड की तारीख, UMEED पोर्टल के डेटा और बोर्ड के पंजीकरण रिकॉर्ड का मिलान जरूरी होगा।
हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि वह आरटीआई प्रक्रिया के तहत मांगी गई विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए आगे भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।






