टेंडर निरस्त, फिर भी सड़क का कर दिया शुभारंभ! 17 लाख की सड़क पर शिलापट खड़ा, धरातल पर काम शून्य


लालकुआं ( नैनीताल)। विकास कार्य शुरू होने से पहले शिलान्यास और शुभारंभ के शिलापट लगना आम बात है, लेकिन लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के हल्दूचौड़ स्थित डूंगरपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी विकास कार्यों की प्रक्रिया और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां जिस सड़क निर्माण कार्य का टेंडर निरस्त हो चुका था, उसका शुभारंभ शिलापट लगाए जाने का मामला सामने आया है। शिलापट लगने के बावजूद सड़क का निर्माण धरातल पर शुरू नहीं हुआ।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि आखिर जब सड़क निर्माण का टेंडर ही निरस्त हो चुका था तो शुभारंभ का शिलापट किस आधार पर लगाया गया? अब स्थानीय लोग संबंधित विभाग से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने और सड़क का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
17 लाख की लागत से बनना था 250 मीटर सीसी मार्ग
उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग की राज्य योजना के तहत डूंगरपुर में कमल दुम्का के घर तक करीब 0.250 किलोमीटर यानी 250 मीटर सीसी मार्ग का निर्माण प्रस्तावित था। इसकी स्वीकृत लागत करीब 17 लाख रुपये बताई गई है।
इस कार्य को लेकर 22 जून 2026 की तारीख वाला शुभारंभ शिलापट भी मौके पर लगा दिया गया। शिलापट पर स्थानीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट समेत अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित हैं। शिलापट लगने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
लेकिन समय बीतता गया और सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद सामने आई टेंडर निरस्तीकरण की जानकारी
सड़क का काम शुरू नहीं होने से परेशान स्थानीय निवासी कमल दुम्का ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित ठेकेदार ने कार्य करने में असमर्थता जताई थी। इसके चलते सड़क निर्माण का टेंडर निरस्त हो चुका था।
टेंडर निरस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि टेंडर निरस्त हो चुका था तो उसके बाद सड़क के शुभारंभ का शिलापट कैसे लगाया गया?
शिलापट लगाने से पहले टेंडर की स्थिति क्यों नहीं जांची?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय समन्वय और निगरानी को लेकर उठ रहा है। क्या शिलापट लगाए जाने से पहले संबंधित अधिकारियों ने टेंडर की स्थिति की जांच की थी? यदि टेंडर पहले ही निरस्त हो चुका था तो फिर शुभारंभ कार्यक्रम की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी?
वहीं, यदि संबंधित अधिकारियों को टेंडर निरस्त होने की जानकारी नहीं थी तो यह भी सवाल उठता है कि विकास कार्यों की स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया और मौके पर शुभारंभ के बीच विभागीय स्तर पर समन्वय कितना प्रभावी है।
शिलापट लगा, सड़क नहीं बनी
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें शिलापट नहीं बल्कि सड़क चाहिए। करीब 17 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित सड़क का निर्माण यदि टेंडर निरस्त होने के कारण रुक गया है तो अब नए सिरे से टेंडर कब होगा और निर्माण कार्य कब शुरू किया जाएगा, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की वास्तविक पहचान शिलापट या शुभारंभ कार्यक्रम से नहीं, बल्कि धरातल पर होने वाले निर्माण से होती है। ऐसे में संबंधित विभाग को मामले की स्थिति स्पष्ट करते हुए जल्द से जल्द आगे की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
कमल दुम्का बोले- जरूरत पड़ी तो न्यायालय की शरण लूंगा
प्रभावित पक्ष कमल दुम्का ने मामले पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि उनकी जानकारी के बिना उनके घर तक जाने वाले मार्ग पर शुभारंभ का शिलापट लगा दिया गया। जब काफी समय तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की। शिकायत के बाद उन्हें टेंडर निरस्त होने की जानकारी मिली।
उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से शुरू नहीं कराया गया तो वह अपने अधिकारों के लिए न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।
इन सवालों के जवाब जरूरी
टेंडर निरस्त होने के बावजूद शिलापट कब और किस आधार पर लगाया गया?
शिलापट लगाने से पहले टेंडर की स्थिति की जांच किस अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति ने की?
क्या शिलापट लगाए जाने के समय विभाग को टेंडर निरस्त होने की जानकारी थी?
ठेकेदार द्वारा काम करने में असमर्थता जताने के बाद विभाग ने आगे क्या कार्रवाई की?
अब सड़क निर्माण के लिए दोबारा टेंडर कब जारी किया जाएगा?
स्थानीय लोगों को सड़क की सुविधा आखिर कब तक मिल सकेगी?
फिलहाल मामले में लोक निर्माण विभाग और संबंधित जनप्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। उनका पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर निरस्त होने और शुभारंभ शिलापट लगाए जाने के बीच प्रक्रिया में चूक कहां हुई।
फिलहाल डूंगरपुर के लोगों के सामने एक ही सवाल है—जब 17 लाख रुपये की सड़क का टेंडर ही निरस्त हो चुका था, तो फिर शुभारंभ का शिलापट आखिर खड़ा कैसे हो गया?







