धारी तहसील में आरटीआई से मची हलचल: बाहरी लोगों की भूमि खरीद का खुलेगा रिकॉर्ड, तीन विभागों से मांगी गई पांच वर्षों की विस्तृत जानकारी

हेमंत सिंह गौनिया की आरटीआई पर प्रशासन सक्रिय, भूमि खरीद, दाखिल-खारिज, नियम उल्लंघन और कंपनियों द्वारा खरीदी गई जमीन का मांगा गया पूरा ब्योरा

धारी (नैनीताल)। धारी तहसील क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तराखंड के बाहर के व्यक्तियों, कंपनियों, फर्मों और ट्रस्टों द्वारा खरीदी गई भूमि की जानकारी मांगने वाली सूचना का अधिकार (आरटीआई) की एक विस्तृत अर्जी से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया की ओर से दायर 12 बिंदुओं वाले आवेदन के बाद उपजिलाधिकारी कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।


आरटीआई आवेदन में वर्ष 2023 से वर्तमान तक धारी तहसील, विशेष रूप से सुन्दरखाल और धनाचूली क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों, कंपनियों, फर्मों एवं ट्रस्टों द्वारा खरीदी गई भूमि का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। आवेदन में भूमि खरीद-फरोख्त, भूमि श्रेणी परिवर्तन, दाखिल-खारिज, वन भूमि, अवैध प्लॉटिंग, कॉलोनाइजेशन तथा राजस्व संबंधी अनियमितताओं से जुड़े अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
उपजिलाधिकारी कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभागों को हस्तांतरित कर दिया है। पत्र संख्या 24/सू.का.अधि./2025-26, दिनांक 06 जुलाई 2026 के माध्यम से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मांगी गई सूचना नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए तथा की गई कार्रवाई से उपजिलाधिकारी कार्यालय को भी अवगत कराया जाए।
इन विभागों को भेजा गया आवेदन
आरटीआई आवेदन निम्नलिखित विभागों को अग्रसारित किया गया है—
लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय जिलाधिकारी, नैनीताल
लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय खंड विकास अधिकारी, धारी
लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय उप निबंधक, धारी
आरटीआई में उठाए गए प्रमुख सवाल
आवेदन में बाहरी व्यक्तियों, कंपनियों, फर्मों और ट्रस्टों द्वारा खरीदी गई सभी भूमि का विस्तृत विवरण मांगा गया है। इसके साथ ही खरीदारों के नाम-पते, खाता-खसरा संख्या, भूमि की श्रेणी, क्षेत्रफल, रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
आरटीआई में यह भी पूछा गया है कि कितने मामलों में निर्धारित सीमा से अधिक भूमि खरीदी गई और ऐसे मामलों में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की। इसके अलावा एक ही परिवार अथवा सहयोगियों के नाम अलग-अलग रजिस्ट्रियां कर भूमि खरीदने के मामलों का पूरा रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
आवेदन में भूमि श्रेणी परिवर्तन, नामांतरण, प्रतिबंधित भूमि के हस्तांतरण, वन भूमि, सड़क निर्माण, पेड़ कटान, कॉलोनाइजेशन, रिसॉर्ट, होटल, होम-स्टे और प्लॉटिंग परियोजनाओं से संबंधित स्वीकृतियों एवं अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। वहीं भूमि घोटालों, अवैध प्लॉटिंग, गलत दाखिल-खारिज, वन भूमि अतिक्रमण तथा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में हुई जांच और कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा गया है।
प्रशासन ने कहा, संबंधित विभाग देंगे सूचना
उपजिलाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि आवेदन में मांगी गई सूचनाएं विभिन्न विभागों से संबंधित हैं। इसलिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन संबंधित लोक सूचना अधिकारियों को भेज दिया गया है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जाए और इसकी जानकारी उपजिलाधिकारी कार्यालय को भी भेजी जाए।
भूमि खरीद को लेकर फिर तेज हुई चर्चा
धारी तहसील, विशेषकर सुन्दरखाल और धनाचूली क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से बाहरी लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि खरीद की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। ऐसे में यह आरटीआई कई अहम तथ्यों से पर्दा उठा सकती है। यदि रिकॉर्ड में निर्धारित सीमा से अधिक भूमि खरीद, नियमों के उल्लंघन या अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आते हैं, तो उन पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई भी सार्वजनिक हो सकेगी।
अब सभी की निगाहें संबंधित विभागों की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सूचनाओं पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आरटीआई के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि धारी तहसील में पिछले वर्षों के दौरान बाहरी व्यक्तियों और कंपनियों ने कितनी भूमि खरीदी, किन मामलों में नियमों का पालन हुआ और किन मामलों में प्रशासनिक जांच या कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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