दूषित पानी से ग्रामीण बेहाल, 20 से ज्यादा स्कूली बच्चों में पीलिया की पुष्टि

नैनीताल। नैनीताल से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वीरभट्टी, छिंडां मल्ला, गांजा, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला और सड़ियाताल समेत आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने जल संस्थान की पेयजल आपूर्ति पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घरों तक पहुंच रहा पानी साफ नहीं है और इसके सेवन के बाद कई परिवारों में पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़े हैं।
सबसे गंभीर स्थिति ज्योलिकोट क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में सामने आई है। यहां 20 से अधिक छात्रों में पीलिया की पुष्टि होने की जानकारी सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने एहतियातन विद्यालय में आपातकालीन अवकाश घोषित कर दिया। बताया गया है कि छात्रों को पेट दर्द समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें थीं। जांच के बाद पीलिया की पुष्टि होने पर विद्यालय बंद करने का निर्णय लिया गया। स्कूल अब राखी अवकाश के बाद करीब एक सितंबर से दोबारा खुलने की संभावना है।
पानी में गंदगी आने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की आपूर्ति के दौरान कई बार पानी में गंदगी दिखाई देती है। लोगों को आशंका है कि कहीं नाले या सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलकर घरों तक तो नहीं पहुंच रहा है। दूषित पानी की शिकायतों के बाद क्षेत्र में पीलिया, डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार और पेचिश जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की चर्चा है।
ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं। इससे संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर भी लोगों में भय बना हुआ है। हालांकि, बीमारियों और पेयजल के बीच सीधा संबंध पानी की वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पहले भी सामने आ चुकी हैं शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में दूषित पेयजल की समस्या नई नहीं है। इससे पहले भी आसपास के गांवों में पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, पूर्व में पानी के नमूने लिए जाने और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने की कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
स्थायी समाधान की मांग
दूषित पेयजल की शिकायतों के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संस्थान से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पानी के नमूने लेने या कुछ समय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पेयजल स्रोत से लेकर सप्लाई लाइन तक जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर पानी दूषित होने की वजह क्या है।
ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों के पेयजल स्रोतों और लाइनों से तत्काल नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। यदि पानी दूषित पाया जाता है तो प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ ही दूषण के स्रोत को स्थायी रूप से खत्म करने की मांग की गई है।
बच्चों में पीलिया से बढ़ी चिंता
ज्योलिकोट क्षेत्र के स्कूल में 20 से अधिक बच्चों में पीलिया की पुष्टि की सूचना के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजनी चाहिए और घर-घर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर जल संस्थान और प्रशासन की जांच पर है। पानी की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीमारी के मामलों और पेयजल आपूर्ति के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं। लेकिन स्कूली बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने क्षेत्र में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत को जरूर गंभीरता से सामने ला दिया है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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