नक्शे के हिसाब से नहीं किया निर्माण तो होगी कार्रवाई : बीडी तिवारी

एमडीडीए ने आर्किटेक्ट्स और ड्राफ्ट्समैन को दिए सख्त निर्देश, पेड़, नाले व अन्य संरचनाओं का पूरा ब्यौरा देना होगा अनिवार्य

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने भवन निर्माण और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के नक्शों में अधूरी एवं भ्रामक जानकारी देने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी (बीडी तिवारी) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण कार्य नहीं पाया गया या मौके की वास्तविक स्थिति को नक्शे में छिपाया गया तो संबंधित मानचित्र तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही संबंधित आर्किटेक्ट या ड्राफ्ट्समैन को भविष्य में प्राधिकरण में नक्शा प्रस्तुत करने के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।

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एमडीडीए की ओर से आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन और ड्राफ्ट्समैन एसोसिएशन को जारी निर्देशों में कहा गया है कि भवनों और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले सभी मानचित्रों में स्थल की वास्तविक स्थिति का पूर्ण विवरण दर्शाना अनिवार्य होगा। इसमें मौके पर मौजूद पेड़ों की संख्या और उनकी प्रजाति, हाइड्रेशन लाइन, नाले, रेलवे लाइन तथा पहले से निर्मित संरचनाओं की जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित करनी होगी।

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उपाध्यक्ष बीडी तिवारी ने कहा कि वर्तमान में प्राधिकरण के पास आने वाले अधिकांश नक्शों में केवल ग्रीन एरिया दिखाया जाता है, जबकि स्थल पर मौजूद पेड़ों, जल निकासी तंत्र, रेलवे लाइन अथवा अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं का उल्लेख नहीं किया जाता। इससे प्राधिकरण को निर्माण स्थल की वास्तविक परिस्थितियों का सही आकलन करने में कठिनाई होती है और कई बार विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्येक मानचित्र में स्थल पर स्थित सभी पेड़ों का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाए। इसके अलावा ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं तथा तलपट मानचित्रों में सड़कों और पहुंच मार्गों के दोनों ओर पार्किंग क्षेत्रों में प्रस्तावित वृक्षारोपण की व्यवस्था भी स्पष्ट रूप से दिखाई जानी चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो अतिरिक्त वृक्षारोपण का प्रस्ताव भी नक्शे का हिस्सा बनाया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
बीडी तिवारी ने कहा कि मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी नक्शा प्राप्त होने के बाद स्थल का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान यदि नक्शे में दी गई जानकारी और मौके पर हो रहे निर्माण कार्य में किसी प्रकार का अंतर पाया गया तो संबंधित मानचित्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही नियमों की अनदेखी करने वाले व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एमडीडीए के इस फैसले को निर्माण गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाने और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का मानना है कि इससे अवैध निर्माण पर अंकुश लगेगा और विकास परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिलेगी।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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