दमुवाढूंगा के मालिकाना हक की दिशा में बढ़ी कवायद, सीमांकन का काम पूरा


हल्द्वानी। दमुवाढूंगा के वार्ड संख्या 35, 36, 37 और 38 के निवासियों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में राजस्व विभाग की ओर से सर्वे, पिलर स्थापना, ड्रोन एवं सैटेलाइट सर्वे समेत भूमि के सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब वन विभाग से संबंधित सीमांकन और भूमि का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर दिया जा रहा है।

मालिकाना हक से जुड़े लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने के लिए दमुवाढूंगा के जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने वन विभाग से संबंधित सीमांकन कार्य और भूमि अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को बताया कि राजस्व विभाग की ओर से आवश्यक सर्वेक्षण और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। ऐसे में वन विभाग से संबंधित शेष औपचारिकताओं को भी जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लंबे समय से मालिकाना हक की उम्मीद लगाए बैठे दमुवाढूंगा के लोगों को इसका लाभ मिल सके।
जिलाधिकारी ने दिए आवश्यक निर्देश
ज्ञापन पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे दमुवाढूंगा क्षेत्र के लोगों में मालिकाना हक की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रधान महेश जोशी, पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता देवी दयाल उपाध्याय, वार्ड 37 के पार्षद प्रतिनिधि हृदयेश कुमार, वार्ड 36 की पार्षद तनुजा जोशी, वार्ड 35 के पार्षद प्रतिनिधि महेशानंद, मनोनीत पार्षद वार्ड 37 पनराम, वार्ड 38 के पार्षद मनोज भट्ट, पवन कुमार सहित भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लंबे समय से मालिकाना हक की मांग
दमुवाढूंगा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की ओर से लंबे समय से भूमि पर मालिकाना हक की मांग उठाई जाती रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रक्रिया में तेजी आई है। राजस्व विभाग की ओर से सर्वे और सीमांकन का काम पूरा होना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि दमुवाढूंगा के नागरिकों के मालिकाना हक की मांग को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे। अब वन विभाग से संबंधित सीमांकन और भूमि रिकॉर्ड तैयार होने के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।






