ED कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा फैसला, कांग्रेस के दो प्रमुख पदों से दिया इस्तीफा
बोले- मेरी वजह से पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए; कांग्रेस से नाता नहीं तोड़ा

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। रावत ने यह फैसला अपने पूर्व ओएसडी एवं वर्तमान निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई को किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत वजह से कमजोर होने से बचाना है।
किन पदों से हटे हरीश रावत?
हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की घोषणा की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपने की बात कही है।
महत्वपूर्ण: इसे कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं माना जाना चाहिए। रावत ने स्वयं कांग्रेस के साथ अपने संबंध को कायम रखने की बात कही है।
ED की कार्रवाई बनी फैसले की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब ED ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देहरादून सहित कई स्थानों पर तलाशी ली।
जांच के दौरान रावत के पूर्व OSD और वर्तमान PA चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसर की भी तलाशी ली गई। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, वहां से ₹32 लाख नकद, सोना/आभूषण और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की बात सामने आई है। ED की कार्रवाई का संबंध भर्ती परीक्षा में कथित OMR शीट से छेड़छाड़ और अन्य अनियमितताओं की जांच से बताया गया है।
हरीश रावत ने क्या कहा?
रावत ने अपने बयान में कहा कि चंदन सिंह जीना उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल 2014 से 2017 के दौरान OSD रहे थे और बाद में उनके साथ जुड़े रहे। उन्होंने जीना के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अविश्वास जताया, लेकिन साथ ही कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता साबित होती है और उसमें उनकी कोई भूमिका या चूक सामने आती है, तो वह उसके लिए जवाबदेही स्वीकार करने को तैयार हैं।
रावत का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस भ्रष्टाचार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है। ऐसे समय में वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़ा कोई विवाद पार्टी के अभियान को कमजोर करे। इसी कारण उन्होंने दोनों पदों से हटने का फैसला लिया।
भर्ती व्यवस्था पर भी रखा अपना पक्ष
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भर्ती व्यवस्था को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न कदम उठाए थे और उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुई थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी सरकार के स्तर पर कोई निर्णयगत चूक हुई हो और उससे प्रदेश के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो, तो वह उसके लिए उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ किसी प्रकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता के प्रमाण किसी के पास हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मायने
हरीश रावत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। रावत ने यह भी संकेत दिया है कि उनका ध्यान अब चुनाव लड़ने के बजाय कांग्रेस को चुनाव लड़ाने और पार्टी की जीत के लिए काम करने पर रहेगा।
राजनीतिक दृष्टि से उनका पद छोड़ना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। एक ओर यह फैसला पार्टी को संभावित राजनीतिक नुकसान से बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ED की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना बनी हुई है।
जांच जारी, आरोप अभी साबित नहीं
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ED द्वारा की गई कार्रवाई और बरामदगी जांच का हिस्सा है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप या जांच अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। चंदन सिंह जीना अथवा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के संबंध में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। ED की जांच अभी जारी बताई गई है।







