CEC के खिलाफ याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट, SIR और आयोग के सामूहिक निर्णय पर उठे सवाल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्य करने के तरीके और निर्वाचन आयोग के निर्णयों को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को दायर याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस मामले में अभी कोई अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है।
यह मामला विशेष रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और निर्वाचन आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग के नाम पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय अन्य दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की सहमति के बिना लिए गए।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 के तहत निर्वाचन आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग बहुसदस्यीय संस्था है और मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर होना चाहिए।
14 फैसलों को लेकर उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने करीब 14 मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों का संबंध SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं से बताया गया है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग के संबंधित रिकॉर्ड, बैठक के एजेंडे, कार्यवृत्त, फाइल नोटिंग, अनुमोदन और अन्य दस्तावेजों को सामने लाने तथा निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि यह पाया जाता है कि निर्वाचन आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत किया गया, तो ऐसे निर्णयों को अमान्य घोषित किया जाए। SIR से जुड़े कदमों को भी चुनौती दी गई है।
निर्वाचन आयोग का क्या कहना है?
वहीं, निर्वाचन आयोग ने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और उसके भीतर मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्टों को लेकर आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है। 26 सितंबर को आयोग ने SIR से संबंधित प्रक्रियाओं में कुछ बदलावों की भी घोषणा की थी, जिसमें कई मामलों में मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए बुलाने के बजाय बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से दस्तावेज जुटाने की व्यवस्था शामिल है।
अभी सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, निलंबित करने अथवा SIR को रद्द करने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। फिलहाल अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है और मामले की सुनवाई अगले सप्ताह प्रस्तावित है।







