आरटीआई से बड़ा खुलासा: एक साल पहले ही ‘असुरक्षित’ घोषित हो चुका था स्कूल भवन, फिर भी निर्माण में देरी
मोतीपुर-1 प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन पर विभागीय दस्तावेजों ने खोली पोल, बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल

हल्द्वानी/गदरपुर। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने ऊधम सिंह नगर के गदरपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुर-1 के जर्जर भवन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। अभिलेखों के अनुसार विद्यालय भवन को एक वर्ष पहले ही तकनीकी जांच में बच्चों के लिए ‘असुरक्षित (Unsafe)’ घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभाग ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए।
समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा 15 मई 2026 को दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में जून 2026 में उप शिक्षा अधिकारी, गदरपुर ने निरीक्षण रिपोर्ट, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के प्रस्ताव, विभागीय पत्राचार और तकनीकी अभिलेख उपलब्ध कराए। इन दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि विद्यालय भवन लंबे समय से जर्जर और छात्रों के लिए जोखिमपूर्ण स्थिति में था।
आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार विद्यालय प्रबंधन समिति ने 11 फरवरी 2025 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर भवन की गंभीर स्थिति की जानकारी विभाग को दी थी। प्रस्ताव में बताया गया कि विद्यालय की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, छत क्षतिग्रस्त हो गई है तथा शौचालय भी उपयोग योग्य नहीं रह गया है। समिति ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भवन को तत्काल अनुपयोगी घोषित कर नए भवन और शौचालय के निर्माण की मांग की थी।
इसके बाद विद्यालय प्रशासन ने उप शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर भवन का तकनीकी परीक्षण कराने और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। मामला जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भेजा गया।
आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई गई तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार लोक निर्माण विभाग, रुद्रपुर के अधिशासी अभियंता ने 15 अप्रैल 2025 को भवन का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच में दो कक्षाओं की दीवारों में गंभीर दरारें, प्लास्टर उखड़ना, छत से पानी का रिसाव, फर्श की क्षति तथा भवन के कई हिस्सों में संरचनात्मक कमजोरी पाई गई।
तकनीकी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि भवन अत्यधिक जर्जर है तथा उसकी मरम्मत कर दोबारा उपयोग में लाना सुरक्षित और व्यावहारिक नहीं होगा। रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दोनों कक्षाओं को पूर्ण रूप से ‘निष्प्रयोज्य (Unsafe)’ घोषित करने की संस्तुति की गई।
आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में विद्यालय की क्षतिग्रस्त छत, टूटी दीवारों और जर्जर कमरों के फोटोग्राफ, विद्यालय प्रबंधन समिति का प्रस्ताव, विभागीय पत्राचार तथा तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट भी शामिल हैं, जो भवन की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करते हैं।
हालांकि आरटीआई आवेदन के कुछ बिंदुओं पर विभाग ने “सूचना संधारित नहीं है” कहकर उत्तर दिया, जबकि अन्य बिंदुओं पर विस्तृत अभिलेख उपलब्ध कराए गए।
पत्राचार से सामने आई पूरी तस्वीर
दस्तावेजों से पता चलता है कि विद्यालय भवन की खराब स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को काफी पहले से थी। विद्यालय प्रबंधन समिति ने लगातार कार्रवाई की मांग की, उप शिक्षा अधिकारी ने मामला जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा और जिला शिक्षा अधिकारी ने पीडब्ल्यूडी से तकनीकी परीक्षण कराया। इसके बावजूद नए भवन के निर्माण में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दी।
पीडब्ल्यूडी की तकनीकी रिपोर्ट ने भी आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि विद्यालय की दो कक्षाएं बच्चों के उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं और उनकी मरम्मत कर दोबारा उपयोग करना उचित नहीं होगा।
आरटीआई से उठे कई अहम सवाल
आरटीआई से प्राप्त अभिलेख कई गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं—
फरवरी 2025 में विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा भवन को जर्जर बताए जाने के बावजूद तत्काल निर्माण कार्य क्यों शुरू नहीं कराया गया?
अप्रैल 2025 में पीडब्ल्यूडी द्वारा भवन को ‘Unsafe’ घोषित किए जाने के बाद भी नए भवन के निर्माण में देरी क्यों हुई?
जर्जर कक्षाओं और अनुपयोगी शौचालय के बीच बच्चों की पढ़ाई किस व्यवस्था के तहत संचालित होती रही?
भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी तय की गई?
क्या इस मामले में किसी अधिकारी की जवाबदेही निर्धारित की गई?
यदि इस अवधि में कोई हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
इन प्रश्नों के उत्तर विभागीय कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
‘बच्चों की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं’
समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी विद्यालय का भवन जर्जर और असुरक्षित पाया जाता है तो उसके पुनर्निर्माण में देरी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।
उन्होंने कहा कि आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज स्पष्ट रूप से प्रमाणित करते हैं कि संबंधित विद्यालय भवन लंबे समय से खतरनाक स्थिति में था। ऐसे मामलों में केवल पत्राचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और नए भवन एवं शौचालय का शीघ्र निर्माण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
हेमंत सिंह गौनिया ने प्रदेश के सभी जर्जर विद्यालय भवनों का स्वतंत्र तकनीकी सर्वे कराने, जहां भवन असुरक्षित पाए जाएं वहां प्राथमिकता के आधार पर नए भवनों का निर्माण कराने तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।







