माननीय सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के द्वारा ‘मेडिएशन फॉर नेशन 3.0’ नामक एक राष्ट्रव्यापी विशेष मध्यस्थता अभियान का आयोजन “संवाद से समाधान, मध्यस्थता से न्याय — राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0


दिनांक 11.08.2026 माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल / जिला न्यायाधीश श्री प्रशांत जोशी जी के निर्देशन में सिविल जज (सी०डि०) / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल द्वारा बताया गया की नालसा द्वारा “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0 वर्ष 2026 में चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी विशेष मध्यस्थता अभियान है। यह पहले राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 1.0 (2025) और 2.0 (2026 के प्रारम्भ) के बाद इसका तीसरा चरण है। 3.0 के संबंध में उतराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 90-दिवसीय अभियान का कार्य-प्रवाह जारी किया गया है।राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0 का मूल उद्देश्य न्यायालयों में लंबित ऐसे मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सहमति से शीघ्र समाप्त करना है, जिनमें समझौते की वास्तविक संभावना मौजूद हो।इस अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर संचालन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (एम0सी0पी0सी0) के सहयोग से किया जाता है। 1.0 अभियान भी नालास और एम0सी0पी0सी0 का संयुक्त 90-दिवसीय विशेष अभियान था।पहला अभियान 1 जुलाई 2025 से 30 सितंबर 2025 तक 90 दिनों के लिए चलाया गया था। इसका लक्ष्य तालुका न्यायालयों से लेकर जिला एवं उच्च न्यायालयों तक उपयुक्त लंबित मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजना था।1.0 की सफलता के बाद राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0 शुरू किया गया। अभियान के अंतर्गत ऐसे मामलों की पहचान की जाती है जिनमें समझौते की संभावना हो ।प्रमुख श्रेणियाँ हैं—वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद,पति-पत्नी के बीच विवाद,भरण-पोषण संबंधी मामले,घरेलू विवाद मोटर दुर्घटना प्रतिकर दावे , चेक बाउंस के मामले,वाणिज्यिक विवाद,सेवा संबंधी विवाद,वेतन एवं पेंशन से जुड़े विवाद,उपभोक्ता विवाद,बैंक ऋण एवं ऋण वसूली संबंधी मामले,भूमि संबंधी विवाद,भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा,किरायेदारी/बेदखली संबंधी मामले,संपत्ति एवं बंटवारा विवाद,अन्य उपयुक्त दीवानी मामले,ऐसे आपराधिक मामले जिनमें कानूनन समझौता किया जा सकता है।अभियान के अंतर्गत न्यायालयों से अपेक्षा की जाती है कि वे लंबित मामलों में यह पहचान करें कि कौन-से मामले मध्यस्थता के लिए उपयुक्त हैं। पहले अभियान के एसओपी में जुलाई 2025 में मामलों की पहचान, पक्षकारों को जानकारी देने और मामलों को मध्यस्थों को भेजने की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।अर्थात सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है: लंबित मामला → उपयुक्त मामले की पहचान → पक्षकारों को जानकारी → मध्यस्थता के लिए रेफरल → मध्यस्थता बैठक → समझौता/असफलता → न्यायालय में आगे की कार्यवाही, उपयुक्त मामलों के मध्यस्थता से निपटारे से न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है। 2025 के अभियान का घोषित उद्देश्य भी तालुका से उच्च न्यायालय स्तर तक उपयुक्त लंबित मामलों का निपटारा करना था।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सामान्यतः:पक्षकारों को विधिक जानकारी देना,मध्यस्थता के लिए उपयुक्त मामलों की पहचान में सहयोग,पक्षकारों को मध्यस्थता केन्द्र की जानकारी देना, जरूरतमंद व्यक्तियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराना,मध्यस्थता केन्द्रों के माध्यम से प्रक्रिया में सहायता करना,जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना जैसे कार्य किए जाते हैं। आम जनता से अपील है यदि वह इस अवसर का लाभ पाना चाहते है तो वह न्यायालय मे आकर मध्यस्थता के माध्यम लंबित मामलों का निपटारा कर अपना समय और खर्चा बचा सकते हैं।







