हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने जताया जान का खतरा, फोन टैपिंग का आरोप; गैरसैंण सत्र में आत्मदाह की चेतावनी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हुए कांग्रेस विधायक, पुलिस कार्रवाई और पार्टी नेताओं से सहयोग नहीं मिलने पर भी उठाए सवाल

हल्द्वानी। उत्तराखंड में हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। बुधवार, 14 अक्टूबर को हल्द्वानी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के फोन कथित तौर पर टैप किए जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी निजी बातचीत का इस्तेमाल उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। प्रेस वार्ता के दौरान वह भावुक भी हो गए।

अप्रैल 2025 में शिकायत देने का किया दावा

सुमित हृदयेश ने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो नेताओं और उनके परिवारों के फोन पर निगरानी रख रहा है। उनके मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने 24 अप्रैल 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई थी।

विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह सहित अन्य नेताओं के फोन की कथित निगरानी का भी दावा किया। उनका कहना है कि निजी बातचीत सार्वजनिक होने पर राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, फोन टैपिंग और कथित गिरोह की गतिविधियों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

पार्टी नेताओं से सहयोग नहीं मिलने की बात कही

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुमित हृदयेश ने कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के प्रति भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी पार्टी के नेताओं को दी थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में वह राज्य सरकार पर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग मामले की जांच और अपनी शिकायत पर कार्रवाई किए जाने की है।

गैरसैंण विधानसभा सत्र में आत्मदाह की चेतावनी

विधायक ने चेतावनी दी कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वह गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह जैसा कदम उठा सकते हैं। यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई

सुमित हृदयेश की ओर से लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले में निष्पक्ष जांच, शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उचित आकलन महत्वपूर्ण है। फिलहाल, फोन टैपिंग के आरोपों और कथित साजिश की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।


Advertisements

गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

You cannot copy content of this page