हल्द्वानी परिवहन विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी निलंबित, कार्यालय में हथियार लाकर फायरिंग का आरोप

बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति कार्यालय में शस्त्र लाने और पंजीयन अनुभाग के बाहर फायर करने के मामले में परिवहन आयुक्त ने की कार्रवाई

हल्द्वानी/देहरादून, 2 सितंबर 2026।उत्तराखंड परिवहन विभाग से जुड़ी एक गंभीर घटना में परिवहन आयुक्त कार्यालय ने हल्द्वानी में तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी महेंद्र सिंह नेगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कार्यालय परिसर में कथित तौर पर शस्त्र लाने और फायर किए जाने के मामले में की गई है। परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार, 1 सितंबर 2026 को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के कार्यालय में शस्त्र लाया गया तथा शाम करीब 3:40 बजे पंजीयन अनुभाग के बाहर शस्त्र से फायर किया गया। आदेश में कहा गया है कि इस घटना से कार्यालय में उपस्थित कार्मिकों एवं आमजन में भय का वातावरण उत्पन्न हुआ तथा राजकीय कार्य भी प्रभावित हुआ।

आचरण नियमावली के उल्लंघन का उल्लेख

निलंबन आदेश में कहा गया है कि उक्त कृत्य उत्तराखंड कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 के नियम 3(1) एवं 3(2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। आदेश में अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए कहा गया है कि आरोप स्थापित होने की स्थिति में दीर्घ शास्ति दी जा सकती है।

इसी आधार पर अनुशासन एवं अपील नियमावली के नियम 4(1) के तहत महेंद्र सिंह नेगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

उधमसिंह नगर परिवहन कार्यालय से संबद्ध

निलंबन अवधि के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को उप संभागीय परिवहन कार्यालय, उधमसिंह नगर से संबद्ध किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में अन्य प्रतिकर भत्ते भी निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अधीन देय होंगे। संबंधित अधिकारी को यह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वे निलंबन अवधि में किसी अन्य सेवा, योजना, व्यापार अथवा वृत्ति-व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।

कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

सरकारी कार्यालय परिसर में कथित रूप से शस्त्र लाने और फायर किए जाने की घटना ने विभागीय कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, निलंबन आदेश में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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