राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आठ दिवसीय अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न

 

हल्द्वानी, 16 सितंबर 2026। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आठ दिवसीय अकादमिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 7 से 15 सितंबर तक आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 180 शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंतर्गत एनईपी 2020 के विभिन्न आयामों पर केंद्रित कुल 16 अकादमिक सत्र आयोजित किए गए।

इस अवसर पर यूओयू के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए स्थानीय समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण, कार्यक्रम के सभी समन्वयकों एवं आयोजन से जुड़े समस्त सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन एनईपी 2020 के व्यापक उद्देश्यों और उच्च शिक्षा में अपेक्षित शैक्षणिक परिवर्तनों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय एवं सार्थक सहभागिता की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को नीतिगत विमर्श से जोड़ने के साथ-साथ अनुभवों और विचारों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं। कुलपति ने नीपा के साथ हुए इस अकादमिक सहयोग को भविष्य में और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक बनाने की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थानों के मध्य आगामी समय में संयुक्त प्रशिक्षण, शैक्षणिक एवं शोधपरक गतिविधियों की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक एवं स्थानीय समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण ने कार्यक्रम की सफलता के लिए यूओयू के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी तथा नीपा की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी सहित नीपा के समस्त विशेषज्ञों, समन्वयकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ को व्यापक बनाने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के बीच सार्थक अकादमिक संवाद का अवसर प्रदान किया।

प्रो. फर्स्वाण ने यूओयू और नीपा के बीच इस सफल अकादमिक सहयोग को आगे भी निरंतर बनाए रखने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में दोनों संस्थानों के मध्य संयुक्त रूप से और अधिक शैक्षणिक, प्रशिक्षण एवं शोधपरक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक अकादमिक संवाद की अपेक्षा व्यक्त की।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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