उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

सेवा नियमों, अनुशासन, पत्रावली प्रबंधन एवं शासकीय पत्राचार की प्रक्रियाओं पर दिया गया प्रशिक्षण

हल्द्वानी, 24 अक्टूबर 2026। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (सीका) के तत्वावधान में 22 एवं 23 अक्टूबर, 2026 को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों एवं अनुभाग सहायकों के लिए दो दिवसीय क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाना, शासकीय नियमों की समझ विकसित करना तथा कार्यालयी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करना था। उत्तराखण्ड शासन के पूर्व अपर सचिव श्री किशन नाथ ने कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को विभिन्न प्रशासनिक नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, सीका के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे, अतिरिक्त निदेशक प्रो. गगन सिंह, कुलसचिव श्री खेमराज भट्ट तथा आमंत्रित विषय विशेषज्ञ द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रो. गगन सिंह ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विषय विशेषज्ञ श्री किशन नाथ को पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए सीका के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के संचालन के लिए सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता से ही बेहतर अकादमिक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। उन्होंने क्षमता वर्धन कार्यक्रमों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में निरंतर सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशासनिक अधिकारी एवं अनुभाग सहायक किसी भी संस्थान की कार्यप्रणाली की रीढ़ होते हैं। नियमों की सही जानकारी, पारदर्शी कार्यशैली और उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार संस्थान की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुलसचिव श्री खेमराज भट्ट ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरंतरता पर बल देते हुए कहा कि इनसे कार्यों में त्रुटियों को कम करने के साथ-साथ कर्मचारियों का आत्मविश्वास और कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

सेवा नियमों एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर विशेष प्रशिक्षण

प्रथम दिवस के तकनीकी सत्र में राजकीय सेवा की सामान्य शर्तों, सेवा पुस्तिका के रख-रखाव, अवकाश नियमों, स्थायीकरण, ज्येष्ठता निर्धारण, पदोन्नति तथा धारणाधिकार (लियन) से संबंधित प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही आचरण नियमों, सत्यनिष्ठा, नैतिकता, वित्तीय एवं प्रशासनिक ईमानदारी तथा कार्यस्थल पर व्यावसायिक व्यवहार के महत्व से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।

द्वितीय दिवस में अनुशासन एवं अपील नियमों, कदाचार की अवधारणा, विभागीय जांच, आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा अपील एवं पुनरीक्षण से संबंधित प्रावधानों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त पत्रावली प्रबंधन एवं निस्तारण प्रक्रिया के अंतर्गत डाक की प्राप्ति, डायरी एवं ई-ऑफिस में प्रविष्टि, नोटिंग-ड्राफ्टिंग, समयबद्ध निस्तारण तथा अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।

कार्यशाला के दौरान शासकीय पत्राचार के विभिन्न प्रारूपों, जैसे कार्यालय आदेश, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचना, अर्द्धशासकीय पत्र एवं ज्ञापन की संरचना और उनके उचित प्रयोग पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को तथ्यपरक, संक्षिप्त एवं नियमानुकूल टिप्पणियां तैयार करने तथा कार्यालयी पत्राचार में एकरूपता बनाए रखने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

प्रशासनिक कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता बढ़ाने पर जोर

कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने सेवा नियमों, अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं कार्यालयी प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर विषय विशेषज्ञ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को दैनिक प्रशासनिक कार्यों में लागू करने तथा पत्रावलियों के अनावश्यक विलंब को कम करने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला के समापन अवसर पर कुलसचिव श्री खेमराज भट्ट एवं विषय विशेषज्ञ श्री किशन नाथ के प्रति आभार व्यक्त किया गया। प्रतिभागियों से प्रशिक्षण संबंधी फीडबैक देने का आग्रह भी किया गया, ताकि भविष्य में आयोजित होने वाले क्षमता वर्धन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों के आधार पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित करने, प्रशासनिक नियमों एवं पत्राचार प्रारूपों की संक्षिप्त हैंडबुक तैयार करने तथा ई-ऑफिस एवं डिजिटल पत्रावली निस्तारण पर केंद्रित प्रशिक्षण आयोजित करने की संस्तुति की गई। आशा व्यक्त की गई कि इस प्रशिक्षण से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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