बाजपुर में ब्रांडेड शराब बनाने की हाईटेक फैक्ट्री का भंडाफोड़, एसटीएफ ने पकड़ा करोड़ों का फर्जीवाड़ा

चंडीगढ़ मार्क की शराब को मैकडॉवेल नंबर-1 बनाकर उत्तराखंड में बेचने का आरोप, हजारों बोतलें, नकली होलोग्राम और अत्याधुनिक मशीनें बरामद

बाजपुर (ऊधमसिंह नगर)। ऊधमसिंह नगर के बाजपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ब्रांडेड शराब के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान एक ऐसी हाईटेक फैक्ट्री पकड़ी गई, जहां चंडीगढ़ मार्क की शराब को प्रसिद्ध ब्रांड मैकडॉवेल नंबर-1 के नाम से तैयार कर उत्तराखंड के बाजार में असली बताकर बेचे जाने का आरोप है। मौके से हजारों बोतलें, नकली होलोग्राम, पैकेजिंग सामग्री और अत्याधुनिक फिलिंग, सीलिंग व लेबलिंग मशीनें बरामद की गई हैं।

एसटीएफ की छापेमारी में 1,632 मैकडॉवेल नंबर-1 के क्वार्टर, 1,016 बोतल 111 आरसीई व्हिस्की (चंडीगढ़ मार्क), उत्तराखंड आबकारी विभाग के कथित नकली होलोग्राम, बड़ी संख्या में खाली क्वार्टर, ढक्कन, रैपर तथा शराब की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद हुईं। अधिकारियों के अनुसार बरामद सामग्री से बड़े पैमाने पर नकली ब्रांडेड शराब तैयार किए जाने की आशंका है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह चंडीगढ़ मार्क की 111 आरसीई व्हिस्की कम कीमत पर खरीदकर बाजपुर लाता था। इसके बाद 750 मिलीलीटर की एक बोतल से 180-180 मिलीलीटर के चार क्वार्टर तैयार किए जाते थे। इन क्वार्टरों पर मैकडॉवेल नंबर-1 के रैपर, ढक्कन और उत्तराखंड आबकारी विभाग के कथित फर्जी होलोग्राम लगाकर उन्हें असली ब्रांड के रूप में बाजार में सप्लाई किया जाता था।
आबकारी विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार करीब 240 रुपये कीमत की एक बोतल से तैयार चार क्वार्टरों को लगभग 170 रुपये प्रति क्वार्टर के हिसाब से बेचा जाता था। इस तरह एक बोतल से करीब 680 रुपये की बिक्री कर गिरोह कई गुना मुनाफा कमा रहा था। साथ ही सरकार को राजस्व का भारी नुकसान भी पहुंचाया जा रहा था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि मामला केवल अवैध शराब के कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी राजस्व की चोरी, उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और प्रतिष्ठित शराब ब्रांडों के नाम का दुरुपयोग भी शामिल है। एसटीएफ और आबकारी विभाग अब इस नेटवर्क से जुड़े शराब आपूर्तिकर्ताओं, नकली पैकेजिंग तैयार करने वालों और वितरण तंत्र की अन्य कड़ियों की जांच में जुटे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने पर इस संगठित नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और पूरे फर्जीवाड़े का दायरा और बड़ा होने की संभावना है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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