उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ी, आपदा मंत्री मदन कौशिक ने विभागों को किया 24×7 अलर्ट

राज्य की 13 संवेदनशील झीलों पर सेंसर और ड्रोन से होगी रियल टाइम निगरानी, SEOC पहुंचकर मंत्री ने ली समीक्षा

देहरादून, 1 सितंबर 2026 नेपाल में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के बाद उत्तराखंड सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। राज्य में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने सभी संबंधित विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री मदन कौशिक ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहुंचकर ग्लेशियर झीलों की स्थिति और संभावित जोखिम की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और जनजीवन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

क्या है तैयारी?
13 झीलें संवेदनशील: उत्तराखंड में कुल 450 के आसपास ग्लेशियर झीलें हैं, जिनमें से 13 को सबसे ज्यादा संवेदनशील चिन्हित किया गया है। इन पर अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जाएंगे।
तकनीक से निगरानी: ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए विश्वभर में उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी, अब सेंसर और ड्रोन से रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी।
सीएम के निर्देश: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24 घंटे सातों दिन अलर्ट मोड में कार्य करें, राहत और बचाव में एक क्षण की भी देरी न हो।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन के अनुसार चार संवेदनशील झीलों का सर्वे पूरा हो चुका है और बाकी पर एक्सपर्ट टीमें ग्राउंड जीरो से स्टडी कर रही हैं। ISRO की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि अकेले उत्तराखंड में 345 ग्लेशियर झीलों का दायरा बढ़ा है, जो GLOF (Glacial Lake Outburst Flood) के लिहाज से खतरनाक है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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