पूर्व कृषि निदेशक गौरीशंकर का निधन, अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

हल्द्वानी। उत्तराखंड के पूर्व कृषि निदेशक गौरीशंकर के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके आकस्मिक निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है।

जानकारी के अनुसार, पूर्व कृषि निदेशक गौरीशंकर का बीते दिन हृदयाघात के चलते निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने विभागीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उनके निधन का समाचार मिलते ही कृषि विभाग सहित सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
गुरुवार को रानीबाग स्थित पवित्र चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके पुत्र डॉ. विपुल ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। इस दौरान उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा परिजनों को ढांढस बंधाया।
पूर्व राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह खनवाल ने गौरीशंकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह बेहद मिलनसार, सरल और मधुर व्यवहार के धनी व्यक्ति थे। समाज के हर वर्ग के लोगों से उनका आत्मीय संबंध था। उन्होंने कहा कि गौरीशंकर हमेशा लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते थे और समाजसेवा के कार्यों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देते थे। उनके निधन से समाज ने एक कर्मठ और संवेदनशील व्यक्तित्व को खो दिया है।
पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरेंद्र बोरा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता भगवती प्रसाद त्रिकोटी, भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जीवन चंद्र उप्रेती, पूर्व सैनिक कुंदन सिंह मेहता, श्याम सिंह नेगी, हेमवती नंदन दुर्गापाल समेत अनेक लोगों ने भी गौरीशंकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहीं लालकुआं के विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने भी पूर्व कृषि निदेशक गौरीशंकर के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
गौरीशंकर के निधन से क्षेत्र ने एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी और लोकप्रिय व्यक्तित्व को खो दिया है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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