धामी सरकार ने 18 भाजपा नेताओं को बांटे दायित्व, हुकम सिंह कुंवर बने राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न संस्थाओं में दायित्व सौंपने का सिलसिला जारी रखते हुए 18 नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी हैं। शासन की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। नई नियुक्तियों के तहत नेताओं को निगमों, परिषदों, समितियों और आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार तथा गैर सरकारी निदेशक जैसे पदों पर तैनात किया गया है।
जारी सूची के अनुसार चंपावत निवासी हुकम सिंह कुंवर को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं देहरादून के आचार्य संतोष खंडूड़ी को जनसंख्या विश्लेषण समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा नैनीताल के देवेंद्र सिंह ढैला को उत्तराखंड बागवानी परिषद तथा हरिद्वार के नितिन गौतम को ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार एवं अनुश्रवण परिषद में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऊधम सिंह नगर की मोहिनी पोखरिया को राज्य स्तरीय सतर्कता समिति और रामपाल को बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
चंपावत के मनोज कालाकोटी को उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग तथा नैनीताल के हरीश चंद्र पांडे को सिंचाई सलाहकार समिति में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है।
पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े दायित्वों में चंपावत के सुभाष बगौली को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद में सतत पर्यटन सलाहकार नियुक्त किया गया है। वहीं चमोली के माधव सेमवाल को बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) में सलाहकार बनाया गया है।
जीएमवीएन और केएमवीएन में भी हुईं नियुक्तियां
सरकार ने गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) में भी गैर सरकारी निदेशकों की नियुक्तियां की हैं। देहरादून के मोहित शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, पारस गोयल, विशाल गुप्ता और ऋतु मित्रा को गढ़वाल मंडल विकास निगम में गैर सरकारी निदेशक बनाया गया है।
वहीं ऊधम सिंह नगर के पुष्कर सिंह कोश्यारी, बागेश्वर के दयाल सिंह तथा चंपावत के रोहित बिष्ट को कुमाऊं मंडल विकास निगम में गैर सरकारी निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में अनुभवी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर संगठनात्मक संतुलन साधने का प्रयास कर रही है। नई नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







