भाजपा ने दिये दायित्व या बांटी चुनावी रेवड़ी?

उत्तराखंड में 100 पार नियुक्तियों पर सियासत तेज

देहरादून: धामी सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने के नाम पर 100 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न दायित्व सौंपे हैं। सरकार का दावा है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी नियुक्तियां और कार्यकर्ताओं को खुश करने की रेवड़ी बता रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इन दायित्व बंटवारों को लेकर बहस तेज हो गई है। तीन दिनों में 100 से अधिक नेताओं को आयोगों, परिषदों, निगमों और समितियों में जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में चुनावी साल में किए गए ये दायित्व बंटवारे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद का केंद्र बन गए हैं।
सरकार का तर्क है कि इन नियुक्तियों से संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि यह प्रक्रिया चुनावी रेवड़ी है और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने तथा पार्टी के भीतर असंतोष दूर करने की कोशिश है।
एक दायित्वधारी को प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये मानदेय, 80 हजार रुपये वाहन व्यय और कार्यालय संचालन के लिए 25 हजार रुपये तक का भत्ता दिया जाता है। कांग्रेस इसे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ बता रही है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता आमेंद्र बिष्ट ने कहा, “भाजपा सरकार इन नियुक्तियों के जरिए राजनीतिक हित साध रही है। जिन लोगों को दायित्व दिए गए हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे नेता हैं जो अन्य दलों से भाजपा में आए हैं। यह पारंपरिक कार्यकर्ताओं को उपेक्षित महसूस करवा रहा है।”
राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में दायित्वधारियों की नियुक्ति राजनीतिक संतुलन बनाने और नए शक्ति केंद्र मजबूत करने की रणनीति प्रतीत होती है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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