महर्षि वाल्मीकि जयंती पर भवाली में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए अखिलेश सेमवाल

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान, आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का लिया संकल्प

भवाली। महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर भवाली में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के जिला संयोजक, पर्यटन गतिविधि प्रकोष्ठ अखिलेश सेमवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों, विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, समानता, आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिलेश सेमवाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन सत्य, धर्म, ज्ञान, सदाचार और मानवता की प्रेरणा देता है। उनकी महान रचना रामायण भारतीय संस्कृति, मर्यादा, नैतिक मूल्यों और आदर्श जीवन का अनुपम उदाहरण है। रामायण में वर्णित आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने के साथ ही लोगों को कर्तव्य, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके विचारों को जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, समानता, सद्भाव और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
सामाजिक समरसता और भाईचारे पर दिया जोर
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और समाज में एकता की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने, महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में भवाली मंडल अध्यक्ष हिमांशु बिष्ट, मंडल उपाध्यक्ष शुभम, आयुष, वाल्मीकि समाज के जिला अध्यक्ष राजेंद्र, अंकित सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर अखिलेश सेमवाल ने क्षेत्रवासियों को महर्षि वाल्मीकि जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने के साथ समाज में एकता, सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ाते हैं।
उन्होंने लोगों से महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को केवल आयोजनों तक सीमित न रखकर उन्हें अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की, ताकि समाज में सकारात्मकता, समानता और सामाजिक समरसता को और अधिक मजबूती मिल सके।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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