आरटीआई खुलासा: नैनीताल के धारी क्षेत्र में निर्माण और प्लॉटिंग पर गंभीर सवाल, कई मामलों में स्वीकृति के अभिलेख नहीं मिले!

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के दस्तावेजों में आवासीय भवनों, दुकानों और प्लॉटिंग के कई प्रकरण दर्ज, सुनवाई की स्थिति में मामले

हल्द्वानी/नैनीताल। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया को प्राप्त दस्तावेजों ने नैनीताल जिले के धारी क्षेत्र में भवन निर्माण, दुकानों, प्लॉटिंग और लेआउट से जुड़े मामलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल के कार्यालय से जारी पत्र और उसके साथ संलग्न अभिलेखों में कई निर्माण स्थलों पर स्वीकृति प्रस्तुत नहीं किए जाने अथवा स्वीकृति संबंधी अभिलेख नहीं दिखाए जाने का उल्लेख किया गया है।

18 अगस्त 2026 के पत्र में सूचना उपलब्ध कराने की कार्रवाई का उल्लेख

कार्यालय जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल के पत्रांक 964, संदर्भ संख्या 2026-27 के पत्र में बताया गया है कि हेमंत सिंह गोनिया के 2 जुलाई 2026 के सूचना अनुरोध के बिंदु संख्या 7 से संबंधित सूचना उपलब्ध कराने के लिए मामला सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के अंतर्गत संबंधित कार्यालय को अंतरित किया गया था। पत्र में कहा गया है कि मांगी गई सूचना संलग्न करके भेजी जा रही है। पत्र पर लोक सूचना अधिकारी, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल के हस्ताक्षर हैं।

आवासीय भवनों से लेकर दुकानों और प्लॉटिंग तक के मामले दर्ज

संलग्न अभिलेखों में धारी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आवासीय भवनों, गैर-आवासीय भवनों, दुकानों, ग्रुप हाउसिंग, लेआउट और प्लॉटिंग से संबंधित मामले दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2025 तथा वर्ष 2026 के प्रकरण शामिल हैं। कई प्रविष्टियों में भवन निर्माण की स्थिति, निर्माण का क्षेत्रफल, संबंधित अधिनियम की धाराएं और स्थल के अक्षांश-देशांतर भी दर्ज किए गए हैं।

कई प्रविष्टियों में स्वीकृति प्रस्तुत नहीं करने का उल्लेख

दस्तावेजों में कुछ मामलों में निर्माण कार्य जारी होने के साथ यह उल्लेख है कि स्थल पर कोई स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई अथवा स्वीकृति संबंधी अभिलेख नहीं दिखाए गए। कुछ प्रविष्टियों में नियत तिथि पर स्वीकृत अभिलेख दिखाना अनिवार्य बताया गया है। इन टिप्पणियों से संबंधित निर्माणों की स्वीकृति, प्राधिकरण की कार्रवाई और नियमों के अनुपालन की स्थिति की जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

भवनों के निर्माण और मानचित्र स्वीकृति पर उठे सवाल

संलग्न तालिका की कुछ प्रविष्टियों में दो या तीन मंजिला भवन, कॉलम और बीम का निर्माण, प्रथम एवं द्वितीय तल पर निर्माण कार्य तथा अन्य निर्माण गतिविधियों का उल्लेख है। कुछ मामलों में निर्माण के लिए स्वीकृति प्रस्तुत नहीं किए जाने की टिप्पणी दर्ज है। वहीं, कुछ अन्य मामलों में निर्माण की प्रकृति प्लॉटिंग या लेआउट के रूप में दर्ज की गई है। इन सभी मामलों की वास्तविक स्थिति संबंधित स्वीकृत मानचित्रों, प्राधिकरण के मूल अभिलेखों और स्थल निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगी।

कई मामलों की स्थिति ‘HEARING’ दर्ज

प्राधिकरण के उपलब्ध दस्तावेजों में अनेक प्रकरणों के सामने ‘HEARING’ अर्थात सुनवाई दर्ज है। इससे संबंधित मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया का संकेत मिलता है, लेकिन केवल इस प्रविष्टि के आधार पर अंतिम आदेश, दोष सिद्ध होने या दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं की जा सकती। प्रत्येक मामले में सुनवाई की तारीख, पक्षकारों का जवाब, पारित आदेश और आगे की कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।

प्लॉटिंग और भूमि उपयोग के मामलों की भी जांच जरूरी

संलग्न अभिलेखों में कुछ मामलों में भूमि पर प्लॉटिंग किए जाने, लेआउट तैयार किए जाने और भूमि के उपयोग से संबंधित गतिविधियों का उल्लेख है। एक प्रविष्टि में लगभग 50 नाली भूमि खरीदकर प्लॉटिंग तथा रिसॉर्ट आदि के निर्माण की योजना का विवरण भी दर्ज है। ऐसे मामलों में भूमि के उपयोग, लेआउट की स्वीकृति और संबंधित नियमों के पालन की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण है।

हेमंत गोनिया ने उठाए पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि किसी निर्माण स्थल पर स्वीकृति संबंधी अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित प्राधिकरण को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण की जांच कब की गई, संबंधित व्यक्ति को क्या नोटिस दिया गया, सुनवाई में क्या निर्णय हुआ और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई की गई।

इन बिंदुओं पर प्राधिकरण से मांगा जाना चाहिए स्पष्ट जवाब

1. संबंधित सभी निर्माणों के स्वीकृत मानचित्रों और निर्माण अनुमतियों की प्रमाणित प्रतियां।
2. प्रत्येक प्रकरण में जारी नोटिस, निरीक्षण रिपोर्ट और सुनवाई की कार्यवाही की प्रतियां।
3. जिन मामलों में स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई, उनमें की गई कार्रवाई का विवरण।
4. जिन प्रकरणों की स्थिति ‘HEARING’ दर्ज है, उनकी सुनवाई की तारीखें और पारित आदेशों की प्रमाणित प्रतियां।
5. प्लॉटिंग और लेआउट से संबंधित स्वीकृतियों, भूमि उपयोग और नियमानुसार की गई जांच का विवरण।
6. जिन मामलों में कार्रवाई लंबित है, उनमें जिम्मेदार अधिकारी, लंबित रहने का कारण और वर्तमान स्थिति।

निष्कर्ष: आरटीआई से सामने आए अभिलेख धारी क्षेत्र में निर्माण और प्लॉटिंग से जुड़े मामलों की गंभीर जांच की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन मामलों में स्वीकृति संबंधी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, उनमें प्राधिकरण ने क्या कार्रवाई की और सुनवाई वाले प्रकरणों का अंतिम निस्तारण कब तक होगा। इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक आदेशों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

रिपोर्ट: आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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