ज्योलिकोट में जलजनित बीमारी का कहर: दो मौतों के बाद भी नहीं थम रही ग्रामीणों की मुसीबत, बिजली-पानी संकट ने बढ़ाई परेशानी
दो माह से दूषित पेयजल की शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान; दर्जनों लोग अस्पतालों में भर्ती, कई की हालत गंभीर

हल्द्वानी/ज्योलिकोट। नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी के बढ़ते प्रकोप के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के मुताबिक बीमारी के चलते अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है और कुछ मरीज आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस संकट के बीच बिजली और पेयजल व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित है। ज्योलिकोट के ग्राम प्रधान नवल आर्या के अनुसार गांव में पिछले करीब पांच दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है, जबकि करीब तीन दिनों से पेयजल संकट बना हुआ है।
दूषित पानी की लाइन बंद, बारिश से दूसरी लाइनें क्षतिग्रस्त
ग्राम प्रधान के मुताबिक जिस पेयजल लाइन से दूषित पानी आने की शिकायत थी, उसे बंद कर दिया गया है। वहीं, बारिश के कारण अन्य पेयजल लाइनों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
स्थानीय स्तर पर बिजली व्यवस्था प्रभावित होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनजीवन पर भी इसका असर पड़ रहा है। बताया गया है कि गांव का लाइनमैन भी बीमारी के कारण बिस्तर पर है, जिससे बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने में और कठिनाई पैदा हो रही है।
गांव वालों की जांच करने वाली युवती भी पहुंची आईसीयू
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक तस्वीर यह सामने आ रही है कि चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करने वाली ज्योलिकोट की एक युवती, जिसने बड़ी संख्या में ग्रामीणों के टेस्ट किए, स्वयं भी बीमारी की चपेट में आ गई। हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
यह घटना इस संकट की गंभीरता को समझने के लिए पर्याप्त है कि बीमारी का प्रकोप किस स्तर तक पहुंच चुका है।
दो माह पहले से ग्रामीण उठा रहे थे दूषित पानी का मुद्दा?
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो महीने से पेयजल लाइन में सीवर का पानी मिलकर आने की शिकायतें की जा रही थीं। यदि यह दावा सही है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुरुआती शिकायतों के बाद समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
आज जब बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं, मौतें हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, तब यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि जल स्रोत, पाइपलाइन और सीवर व्यवस्था की समय रहते जांच क्यों नहीं की गई?
अब जिम्मेदारी तय करने का समय
ज्योलिकोट की मौजूदा स्थिति महज स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि पेयजल, स्वच्छता, बिजली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की संयुक्त परीक्षा बन चुकी है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल—
- प्रभावित गांव में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करे।
- पेयजल लाइनों और स्रोतों की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराए।
- दूषित पानी में सीवर के मिश्रण की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- बीमारी से प्रभावित लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।
- गंभीर मरीजों के लिए आवश्यकतानुसार आईसीयू एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए।
- बिजली आपूर्ति को तत्काल बहाल किया जाए।
- बारिश से क्षतिग्रस्त पेयजल एवं विद्युत लाइनों की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए।
- पूरे मामले में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल: शिकायतों के बाद भी क्यों नहीं जागा तंत्र?
ज्योलिकोट के ग्रामीणों की पीड़ा अब एक बड़ा सवाल बनकर सामने है—अगर दूषित पेयजल की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो समय रहते स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
दो मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाएगा।








